राष्ट्रीय
30-May-2026
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बेंगलुरु(ईएमएस)। कर्नाटक की राजनीति में चल रहा सत्ता परिवर्तन सिर्फ एक चेहरा बदलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस के भविष्य की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुका है। सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलने जा रही है, लेकिन उनके लिए यह ताज कांटों भरा माना जा रहा है। कांग्रेस हाईकमान ने यह बड़ा फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जब पार्टी दक्षिण भारत में अपने इस सबसे मजबूत गढ़ को किसी भी कीमत पर सुरक्षित रखना चाहती है। राहुल गांधी की रणनीति साफ है कि कर्नाटक को आगामी विधानसभा चुनाव तक कांग्रेस के एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित किया जाए। हालांकि, सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि पिछले चार दशकों में कर्नाटक में कोई भी सत्ताधारी दल लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी नहीं कर पाया है। ऐसे में शिवकुमार के सामने सिर्फ सरकार चलाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि उन्हें इस 40 साल पुराने राजनीतिक इतिहास को बदलने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। यही वजह है कि दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक इस बदलाव को कांग्रेस का सबसे बड़ा राजनीतिक दांव माना जा रहा है। डीके शिवकुमार को संगठन का एक बेहद मजबूत और कुशल खिलाड़ी माना जाता है। संकट के समय विधायकों को एकजुट रखने से लेकर पार्टी को टूटने से बचाने तक उन्होंने कई बार अपनी उपयोगिता साबित की है। लेकिन मुख्यमंत्री की गद्दी संभालने के बाद उनके सामने समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे। अब उन्हें विपक्ष के हमलों के साथ-साथ अपनी ही पार्टी के भीतर पनपने वाले असंतोष को भी संभालना होगा। सिद्धारमैया भले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ चुके हैं, लेकिन उन्होंने राज्यसभा जाने से साफ इनकार करके यह संकेत दे दिया है कि वह कर्नाटक की सक्रिय राजनीति से दूर नहीं होने वाले हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि शिवकुमार को सरकार के हर बड़े फैसले में राजनीतिक संतुलन बनाकर चलना होगा। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर राज्य का जातीय समीकरण बिगड़ा, तो भाजपा और जेडीएस गठबंधन इसका बड़ा राजनीतिक फायदा उठा सकते हैं। सिद्धारमैया के हटने से उनके कुरुबा समुदाय में संभावित नाराजगी को दूर करने के लिए कांग्रेस उनके बेटे यतींद्र को सरकार या संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी देने पर विचार कर रही है। दूसरी ओर, वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले डीके शिवकुमार की अपनी जाति पर मजबूत पकड़ पार्टी के लिए एक बड़ा सहारा बन सकती है। कांग्रेस को उम्मीद है कि इस फैसले से जेडीएस का पारंपरिक वोक्कालिगा वोट बैंक धीरे-धीरे उसकी तरफ शिफ्ट हो जाएगा, जिससे दक्षिण कर्नाटक की कई सीटों पर सीधा असर पड़ेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवकुमार की सबसे बड़ी ताकत उनकी जुझारू छवि और गांधी परिवार से उनकी नजदीकी है। हालांकि, भाजपा ने इस बदलाव के बाद कांग्रेस के भीतर संभावित गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान को एक बड़ा मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है। यदि कांग्रेस इस आंतरिक असंतोष को समय रहते नहीं संभाल पाई, तो विपक्षी दल इसे आने वाले चुनावों में एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल करेंगे। वीरेंद्र/ईएमएस 30 मई 2026