राष्ट्रीय
30-May-2026
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मंदिर आने वाले श्रद्धालु भी कर सकते हैं दर्शन अयोध्या (ईएमएस)। अयोध्या में नवनिर्मित श्रीराम मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सदियों के संघर्ष, समर्पण और करोड़ों सनातनियों की साधना का केंद्र है। अब इस ऐतिहासिक निर्माण में प्रयोग किए गए औजारों और मशीनों को भी संरक्षित करने का निर्णय हुआ है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण से जुड़े इन उपकरणों को भविष्य के लिए संग्रहित कर संग्रहालय में प्रदर्शित करने की योजना बनाई है। ट्रस्ट का मानना है कि ये औजार महज मशीनें नहीं, बल्कि उस गौरवशाली यात्रा के साक्षी हैं जिसने एक भव्य सपने को साकार किया है। ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर निर्माण में कारीगरों और संतों के योगदान जितना ही महत्व उन उपकरणों का भी रहा, जिनकी सहायता से पत्थरों को तराशकर दिव्य मंदिर का स्वरूप दिया गया। इसकारण इन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए धरोहर के रूप में सहेजा जाएगा। यह पहल उन प्रारंभिक प्रयासों को भी सम्मान देती है जब वर्ष 1990 में रामघाट चौराहे पर विश्व हिंदू परिषद द्वारा मंदिर निर्माण कार्यशाला स्थापित की गई थी। उस समय प्रसिद्ध सोमपुरा परिवार के वास्तुकार चंद्रकांत भाई सोमपुरा द्वारा तैयार नक्शे के आधार पर पत्थरों की नक्काशी इन्हीं उपकरणों से शुरू हुई थी, और अब उन्हें भी इतिहास की धरोहर माना जा रहा है। संरक्षित होने वाले उपकरणों में छेनी, हथौड़ी, मुंगरी, घुमावदार आरी, स्टोन कटर मशीन, ग्राइंडर और पॉलिशर जैसे महत्वपूर्ण औजार शामिल हैं। इसमें सबसे खास वर्ष 1990 में लगभग 40 लाख रुपये की लागत से खरीदी गई विशाल स्टोन कटर मशीन है, जिसने करीब एक लाख घनफीट पत्थरों की कटाई की थी। इस राम मंदिर निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी धरोहरों में से एक माना जा रहा है। ट्रस्ट मंदिर निर्माण से जुड़े सभी अभिलेखों, तस्वीरों और साक्ष्यों का डिजिटलीकरण भी करा रहा है। भविष्य में इन्हें रामकथा संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालु मंदिर निर्माण की पूरी यात्रा को करीब से समझ सकें। विहिप के मीडिया प्रभारी के अनुसार, रामभक्त केवल मंदिर के दर्शन ही नहीं करने वाले हैं, बल्कि उन औजारों को भी देख सकते हैं, जिसमें यह ऐतिहासिक निर्माण संभव हुआ। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को राम मंदिर आंदोलन और निर्माण की गौरवगाथा से जोड़ने का कार्य करेगी। आशीष/ईएमएस 30 मई 2026