व्यापार
30-May-2026


- देश में यूरिया 10 फीसदी और डीएपी की बिक्री 39 फीसदी तक बढ़ी नई ‎दिल्ली (ईएमएस)। पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के बाद से भारतीय किसानों में उर्वरक की उपलब्धता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिसके चलते देश में यूरिया और डाई अमोनिया फॉस्फेट (डीएपी) की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। खरीफ सम्मेलन में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, किसानों द्वारा घबराहट में की गई खरीद, अत्यधिक भंडारण और जमाखोरी के कारण मार्च से मई के बीच यूरिया की बिक्री में लगभग 10 फीसदी और डीएपी की बिक्री में लगभग 39 फीसदी का उछाल आया है। इसके साथ ही, युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर उर्वरक आयात की लागत में भी भारी वृद्धि हुई है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि युद्ध के बाद से यूरिया की दैनिक बिक्री सामान्य 40,000-45,000 टन से दोगुनी होकर लगभग 80,000-85,000 टन हो गई है। 1 मार्च से 25 मई के बीच उपभोक्ताओं ने कुल 50.5 लाख टन यूरिया और 12.4 लाख टन डीएपी खरीदी, जो पिछले साल की इसी अवधि से क्रमशः 4.5 लाख टन और 3.5 लाख टन अधिक है। मुख्य रूप से महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में यह अतिरिक्त खरीद देखी गई है। सरकार ने ऐसे 100 जिलों की पहचान की है जहां उर्वरक की बिक्री सामान्य से बहुत अधिक हुई है, जिन पर नजर रखी जा रही है। युद्ध ने उर्वरक लागत को भी बढ़ा दिया है। खाद कारखानों के लिए गैस की खरीद 70-80 प्रतिशत महंगी हुई है, जबकि 25 लाख टन आयातित यूरिया 112 प्रतिशत और 13.5 लाख टन आयातित डीएपी 38 प्रतिशत महंगा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने बेहतर भंडारण के कदम उठाए हैं, जिससे खरीफ सीजन के लिए आवश्यक 390 लाख टन उर्वरक के मुकाबले देश में 200 लाख टन से अधिक का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सतीश मोरे/30मई ---