पटना, (ईएमएस)। बिहार में बेमौसम आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य के कई जिलों में तेज हवाओं, भारी बारिश और ओलों ने खेतों में खड़ी फसलों के साथ-साथ फलों के बागानों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कृषि एवं आपदा प्रबंधन विभाग को तत्काल क्षति का आकलन करने का निर्देश दिया है। सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों और पेड़ों पर लगे फलों को हुए नुकसान का सर्वे कराया जाएगा, ताकि क्षति की वास्तविक स्थिति का पता लगाकर किसानों को उचित राहत उपलब्ध कराई जा सके। - 2.06 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र प्रभावित राज्य में प्री-मानसून के दौरान आए इस असामान्य मौसम ने कृषि क्षेत्र को बड़ा झटका दिया है। अब तक 12 से 19 जिलों में व्यापक नुकसान की सूचना मिली है। उत्तर बिहार और सीमांचल क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2.06 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में खड़ी फसलें प्रभावित हुई हैं। - इन जिलों में सबसे ज्यादा असर मुजफ्फरपुर, कटिहार, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, खगड़िया, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, वैशाली, भागलपुर और पूर्वी चंपारण समेत कई जिलों में तेज हवाओं और बारिश ने सामान्य जनजीवन तथा खेती-किसानी को प्रभावित किया है। कई स्थानों पर हवाओं की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई, जिससे कटाई के लिए तैयार फसलें खेतों में गिर गईं। * मक्का और मूंग की फसल को बड़ा झटका बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए यह नुकसान बेहद महत्वपूर्ण समय पर हुआ है। राज्य की 90 प्रतिशत से अधिक ग्रीष्मकालीन मक्का फसल कटाई के लिए तैयार थी। लेकिन लगातार बारिश और खेतों में जलभराव के कारण मक्का के भुट्टों और दानों के सड़ने का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा नगदी फसल मानी जाने वाली गरमा मूंग की खेती करने वाले किसानों ने भी लगभग पूरी फसल बर्बाद होने की बात कही है। किसानों का कहना है कि फसल खराब होने के साथ-साथ बाजार में कीमतों में गिरावट ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। - लीची और आम के बागानों को भारी नुकसान फलों की खेती भी इस प्राकृतिक आपदा से अछूती नहीं रही। मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध जीआई-टैग प्राप्त लीची को भारी क्षति पहुंची है। तेज हवाओं और बारिश के कारण बड़ी मात्रा में फल पेड़ों से गिर गए हैं और गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। किसानों का अनुमान है कि उन्हें 70 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। वहीं दरभंगा और आसपास के क्षेत्रों में आम के बागानों में भी भारी तबाही हुई है। तेज आंधी के कारण पेड़ों से कच्चे आम और मंजरियां गिर गईं, जिससे उत्पादन में 60 से 70 प्रतिशत तक कमी आने की आशंका जताई जा रही है। प्रभावित जिलों के किसानों का कहना है कि फसल कटाई से ठीक पहले आई इस आपदा ने उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। अररिया के मक्का किसान नरेश मंडल ने कहा, कटाई से ठीक पहले बारिश और तेज हवाओं ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। ऊपर से बाजार में दाम भी गिर रहे हैं, जिससे हमारी हालत और खराब हो गई है। किसानों ने सरकार से जल्द सर्वे कराकर मुआवजा और राहत राशि देने की मांग की है। वहीं राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों तक हरसंभव सहायता पहुंचाई जाएगी। संतोष झा- ३० मई/२०२६/ईएमएस