ग्वालियर ( ईएमएस ) । वक्त के साथ पत्रकारिता स्वरूप भले ही बदला हो लेकिन आज भी समाज का सबसे विश्वसनीय कोई अंग है तो वह है पत्रकारिता। प्रिंट मीडिया के बाद इलेक्ट्रोनिक मीडिया और अब सोशल मीडिया भी एक अपने अलग रंग के साथ लोगों के सामने है। इसके बाद भी अखबारों ने अपना महत्व बनाए रखा है। वरिष्ठ पत्रकार बच्चन बिहारी ने आज ग्वालियर प्रेस क्लब द्वारा मीडिया सेंटर माधवगंज में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में यह बात कही। संगोष्ठी की अध्यक्षता ग्वालियर प्रेस क्लब के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने की बिहारी ने पत्रकारिता को तीन काल खण्ड में विभाजित करते हुए आजादी के पहले, आजादी के बाद और वर्तमान पत्रकारिता पर विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी पत्रकारिता के प्रथम समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड के प्रकाशन की याद में हम यह दिवस मनाते हैं। उन्होंने कहा कि उदन्त मार्तण्ड अर्थात उगते सूरज का प्रकाश आज भी प्रत्येक स्तम्भ को आइना दिखाने का कार्य बखूबी से कर रहा है। उन्होंने पत्रकारिता को उगता सूरज बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी के उपर यह जिम्मेदारी है कि वह पत्रकारिता के सूरज को डूबने न दे और इसका प्रकाश और प्रखर हो इसके लिए प्रयास करे। पत्रकारिता में कॉपी-पेस्ट का चलन अच्छा नहीं है। इससे मौलिकता समाप्त हो रही है। हमें इसे खत्म होने से बचाना है। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ पत्रकार सुरेश दण्डोतिया ने कहा कि प्रिंट मीडिया पहले भी समाज का आइना था और आज भी है। वक्त के साथ इसमें भी बदलाव आया है। इलेक्ट्रोनिक मीडिया के आने के बाद इसके स्तर में जो बदलाव आया है उस पर विचार करने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज भी लोगों में विश्वास है कि मीडिया मशाल लेकर समाज की अगुवाई करता रहेगा, जिसे मीडिया पूरा कर रहा है। इस अवसर पर प्रेस क्लब सचिव सुरेश शर्मा,वरिष्ठ पत्रकारगण राजेन्द्र तलेगांवकर, बृजमोहन शर्मा, विनय अग्रवाल, हरीश चन्द्र, प्रवीण दुबे, जोगेन्द्र सेन,अजय मिश्रा,जितेन्द्र पाठक, रवि उपाध्याय, ने भी परिचर्चा में भाग लेते हुए अपने विचार रखे। परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि दबावों के बाद भी पत्रकारिता अपने लक्ष्य के साथ आगेे बढ रही है। इस अवसर पर फोटो जर्नलिस्ट राजेश जायसवाल एवं मुकेश बाथम सहित अन्य पत्रकार उपस्थित थे।