राष्ट्रीय
31-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला के वैज्ञानिकों ने एआई-सक्षम ऑटोफोकस माइक्रोस्कोपी तकनीक विकसित की है, जो एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया यानी ब्लड कैंसर और मलेरिया जैसी बीमारियों की सटीक पहचान करने में सक्षम साबित हुई है। ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की समय रहते और सटीक पहचान इलाज की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी दिशा में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला के शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस नई तकनीक को पेटेंट भी मिल चुका है। इस तकनीक को संस्थान के इनक्यूबेशन सेंटर से जुड़े स्टार्टअप ग्लोविस्टा इंस्ट्रुमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से विकसित किया गया है। आमतौर पर स्वास्थ्य सेवाओं में माइक्रोस्कोपी तकनीक का उपयोग कैंसर, मलेरिया, तपेदिक और अन्य बीमारियों की जांच के लिए किया जाता है। लेकिन पारंपरिक इक्रोस्कोपी प्रणाली में फोकस को हाथ से समायोजित करना पड़ता है, जिससे प्रक्रिया धीमी हो जाती है और त्रुटियों की संभावना भी बढ़ जाती है। कई बार इसी कारण बीमारी की पहचान और इलाज में देरी हो जाती है। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए शोधकर्ताओं ने ऑप्टोफ्लूडिक डिजिटल माइक्रोस्कोपी प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इसमें डीप लर्निंग आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक को ऑप्टिकल इमेजिंग और स्वचालित गति नियंत्रण प्रणाली के साथ जोड़ा गया है। यह प्रणाली माइक्रोस्कोपिक छवियों का रियल टाइम विश्लेषण करती है और खुद ही फोकस को समायोजित कर देती है। इससे जांच प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, सटीक और भरोसेमंद बन जाती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक इस तकनीक को केवल 1.20 लाख रुपये की लागत में विकसित किया गया है। प्रयोगशाला स्तर पर इसने ब्लड कैंसर, मलेरिया और रक्त कोशिकाओं के वर्गीकरण से जुड़ी जांचों में काफी सटीक परिणाम दिए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि उनका लक्ष्य एक ऐसा हैंडहेल्ड उपकरण विकसित करना है, जो महंगे आयातित स्वचालित माइक्रोस्कोपी सिस्टम जैसी सुविधाएं कम लागत में उपलब्ध करा सके। इस प्रणाली की खास बात यह है कि इसमें एआई आधारित ऑटोफोकस, स्वचालित गति नियंत्रण, क्लाउड आधारित शिक्षण और जटिल जैविक नमूनों की उन्नत इमेजिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के जरिए डिजिटल पैथोलॉजी, स्मार्ट लैब ऑटोमेशन, पॉइंट-ऑफ-केयर हेल्थ डिवाइस और दूरस्थ स्वास्थ्य जांच जैसी सेवाओं को नई गति मिल सकती है। इस शोध दल में सहायक प्रोफेसर डॉ. ईरु बनोथ, शोध स्नातक डॉ. शेख अहमदसैदुलु, डिजाइन इंजीनियर अमोल लालचंद साल्वे और प्रोडक्ट मैनेजर पद्मनाभन सेल्वाकुमार शामिल रहे। इस परियोजना को नेशनल रिसर्च फाउंडेशन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और जैव प्रौद्योगिकी विभाग से अनुसंधान अनुदान भी प्राप्त हुआ है। शोधकर्ताओं के अनुसार अब अगला कदम इस तकनीक के लिए बड़े स्तर पर डेटा तैयार करना और विभिन्न क्षेत्रों में फील्ड ट्रायल करना होगा, ताकि इसे वास्तविक स्वास्थ्य सेवाओं में प्रभावी रूप से इस्तेमाल किया जा सके। सुदामा/ईएमएस 31 मई 2026