व्यापार
31-May-2026
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- पिछली गिरावट के बाद निवेशक सतर्क, जून के पहले हफ्ते में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर रहेगी पैनी नजर मुंबई (ईएमएस)। भारतीय शेयर बाजार ने बीता हफ्ता उतार-चढ़ाव के बीच गिरावट के साथ समाप्त किया, लेकिन निवेशकों की असली परीक्षा अब आने वाले सप्ताह में होगी। 1 जून से 5 जून के बीच कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़े और नीतिगत फैसले बाजार की चाल को निर्धारित करेंगे। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक, देश की जीडीपी रिपोर्ट, पीएमआई आंकड़े और अमेरिका से आने वाले रोजगार संबंधी डेटा निवेशकों के लिए अहम साबित होंगे। बीता हफ्ता भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा, जहां प्रमुख सूचकांकों ने गिरावट दर्ज की। बीएसई का सेंसेक्स 0.85 फीसदी टूटकर 74,775.74 पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी 0.72 फीसदी गिरकर 23,547.75 के स्तर पर आ गया। अब बाजार की नजर अगले हफ्ते (1 जून से 5 जून) आने वाले कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों और नीतिगत फैसलों पर रहेगी, जो बाजार की अगली दिशा तय करेंगे। सप्ताह की शुरुआत में 1 जून को मई महीने के मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स आंकड़े जारी होंगे, जो देश की औद्योगिक गतिविधि का संकेत देंगे। इसी दिन ऑटो कंपनियों की बिक्री के आंकड़े भी आएंगे, जो उपभोक्ता मांग की तस्वीर स्पष्ट करेंगे। इसके बाद, 5 जून को भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े जारी किए जाएंगे। यह आंकड़ा देश की आर्थिक वृद्धि दर का मूल्यांकन करेगा और निवेशकों को अर्थव्यवस्था की समग्र सेहत समझने में मदद करेगा। इस दौरान निवेशकों की सबसे बड़ी नजर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर होगी, जो 3 से 5 जून तक चलेगी। गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून की सुबह फैसलों का एलान करेंगे। बाजार बेसब्री से यह देखना चाहेगा कि क्या ब्याज दरों में कोई बदलाव होगा या दरों को स्थिर रखा जाएगा। यह फैसला बैंकिंग शेयरों और ऋण बाजार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर, 3 जून को अमेरिका से रोजगार और सर्विस सेक्टर से जुड़े अहम आंकड़े आएंगे, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत देंगे और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर कटौती की संभावनाओं पर असर डालेंगे। 5 जून को अमेरिका में बेरोजगारी दर के आंकड़े भी जारी होंगे। इसके अलावा, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर अमेरिका-ईरान संबंधों और कच्चे तेल की कीमतों पर भी निवेशकों की पैनी नजर रहेगी, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें भारतीय महंगाई दर को सीधे प्रभावित करती हैं। आने वाला सप्ताह भारतीय और वैश्विक बाजारों के लिए बेहद अहम साबित होने वाला है। सतीश मोरे/31मई ---