राज्य
31-May-2026


-सिर्फ दो विधायकों वाली भाकपा-माले ने ठोकी दूसरी सीट पर दावेदारी रांची (ईएमएस)। झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव से पहले सत्तारूढ़ महागठबंधन के भीतर सियासी खींचतान तेज हो गई है। विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के हिसाब से एक सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट पर अब तक कांग्रेस अपना स्वाभाविक दावा मानकर चल रही थी। लेकिन अब भाकपा-माले ने इस दूसरी सीट पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर महागठबंधन के समीकरणों को उलझा दिया है। विधानसभा में महज दो विधायक होने के बावजूद भाकपा-माले ने गठबंधन के प्रति अपनी वफादारी और संकट के समय निभाई गई अहम भूमिका का हवाला दिया है। पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता और तीन बार के पूर्व विधायक विनोद सिंह को राज्यसभा भेजने की मांग की है। चेन्नई में पार्टी की केंद्रीय कमेटी की बैठक के दौरान भाकपा-माले के प्रदेश सचिव मनोज भक्त ने साफ कहा कि एक सीट झामुमो अपने पास रखे और दूसरी सीट माले को सौंपे। उन्होंने उम्मीद जताई कि विनोद सिंह के नाम पर झामुमो, कांग्रेस और राजद एकमत होकर समर्थन देंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि फिलहाल पार्टी के लिए सभी विकल्प खुले हैं। हालांकि, भाकपा-माले का यह प्रस्ताव महागठबंधन के बड़े घटकों के गले नहीं उतर रहा है। झामुमो और कांग्रेस के नेताओं ने इसे पूरी तरह अव्यावहारिक बताया है। उनका कहना है कि राज्यसभा चुनाव में भावनाएं नहीं, बल्कि केवल विधायकों का संख्या बल मायने रखता है। चुनावी गणित को समझें तो राज्य में एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 28 वोटों की आवश्यकता होती है। महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जो दो सीटों के लिए बिल्कुल सटीक आंकड़ा है। ऐसे में यदि निरसा से अरूप चटर्जी और सिंदरी से चंद्रदेव महतो (माले के दोनों विधायक) वोटिंग से दूर रहते हैं, तो महागठबंधन का आंकड़ा घटकर 54 रह जाएगा। ऐसी स्थिति में दूसरी सीट पर जीत के लिए गठबंधन को क्रॉस वोटिंग या दूसरी वरीयता के वोटों के सहारे रहना पड़ेगा, जो खेल बिगाड़ सकता है। रामयश/ईएमएस 31 मई 2026