लम्हेटाघाट में 10 एकड़ में लगाए 2 हजार पेड़ प्रतिदिन 300 से 400 नारियल का उत्पादन जबलपुर (ईएमएस)। आमतौर पर समुद्री तटीय क्षेत्रों की फसल माने जाने वाले नारियल को नर्मदा तट पर सफलतापूर्वक उगाकर लम्हेटाघाट के प्रगतिशील किसान अनिल पचौरी ने नई पहचान बनाई है। वर्ष 2017 में शुरू किया गया उनका प्रयोग आज सफल व्यावसायिक खेती का रूप ले चुका है। 10 एकड़ भूमि में लगाए गए करीब 2 हजार नारियल के पेड़ अब प्रतिदिन 300 से 400 नारियल का उत्पादन दे रहे हैं, जिनकी आपूर्ति शहर के विभिन्न क्षेत्रों में की जा रही है। अनिल पचौरी बताते हैं कि दक्षिण भारत की यात्राओं के दौरान उन्होंने नारियल और मसाला फसलों से किसानों को समृद्ध होते देखा। इसी अनुभव ने उन्हें जबलपुर में भी नारियल की खेती का प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पहले इस विषय पर अध्ययन किया और बाद में दो माह तक केरल में किसानों के बीच रहकर खेती की तकनीक, सिंचाई प्रबंधन और पौध संरक्षण की बारीकियां सीखीं। वैज्ञानिक खेती से लाखों की आय... अध्ययन के बाद नर्मदा नदी के समीप पर्याप्त नमी और भूजल उपलब्धता वाले लम्हेटाघाट क्षेत्र का चयन किया गया। नियमित देखभाल, जैविक खाद और बेहतर सिंचाई व्यवस्था के कारण अब पेड़ भरपूर फल देने लगे हैं। किसान के अनुसार वर्तमान में नारियल की बिक्री से प्रतिदिन 15 से 20 हजार रुपये तक की आय हो रही है, जबकि पूरे सीजन में यह आमदनी 30 से 40 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। नारियल के साथ अदरक और आम की भी खेती..... नारियल बागान के बीच अनिल पचौरी ने अदरक की खेती तथा आम्रपाली और मल्लिका प्रजाति के आम के पौधे भी लगाए हैं। इससे अतिरिक्त आय के साथ बागान को मौसम संबंधी जोखिमों से भी सुरक्षा मिलती है। पौधों के पोषण के लिए वे कठौंदा प्लांट से प्राप्त कम्पोस्ट खाद का उपयोग करते हैं। उनकी सफलता ने यह साबित किया है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार के साथ किसान पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर नई संभावनाएं तलाश सकते हैं। सुनील /शहबाज / 31 मई 2026/ 07.00