राज्य
31-May-2026


* दस्तावेजों में गंभीर विरोधाभास उजागर, भविष्य में आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने पर रोक; कानूनी कार्रवाई की भी संभावना तापी (ईएमएस)| जिला पंचायत की गुणसदा सीट से वर्ष 2021-2026 के कार्यकाल के लिए निर्वाचित पूर्व महिला सदस्य एवं कांग्रेस की वरिष्ठ नेता रेहाना राजूभाई गामित का अनुसूचित जनजाति (एसटी) जाति प्रमाणपत्र सूरत विभागीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने जांच के बाद अमान्य घोषित कर दिया है। समिति ने दस्तावेजों में सामने आई गंभीर विसंगतियों के आधार पर यह निर्णय लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वालोड तहसील के वेडछी गांव निवासी राकेश लल्लुभाई चौधरी ने वर्ष 2023 में रेहाना गामित के जाति प्रमाणपत्र को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए विभागीय समिति ने आदिजाति विकास विभाग के विजिलेंस सेल के माध्यम से विस्तृत जांच करवाई। जांच के दौरान सरकारी अभिलेखों में दर्ज जानकारियों के बीच कई गंभीर विरोधाभास सामने आए। वर्ष 2009 के एक प्रमाणपत्र में राजू गामित को रेहाना के पति के रूप में दर्शाया गया था, जबकि वर्ष 2015 के एक अन्य प्रमाणपत्र में उसी राजू गामित को उनके पिता के रूप में दर्ज किया गया। इसके अलावा, स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र में उनके पिता का नाम तुराप गामित पाया गया। इन परस्पर विरोधी जानकारियों के कारण उनके आदिवासी होने के दावे पर गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ। सभी दस्तावेजी साक्ष्यों और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सूरत विभागीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने 31 मई 2026 को रेहाना गामित का जाति प्रमाणपत्र अमान्य घोषित करने का आदेश जारी कर दिया। इस फैसले के बाद अब वे भविष्य में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किसी भी सीट से चुनाव नहीं लड़ सकेंगी। साथ ही, सरकारी दस्तावेजों में कथित रूप से गलत या भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करने के मामले में संबंधित विभागों द्वारा कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है। यह मामला तापी जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। सोंगढ़ क्षेत्र को कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन इस घटनाक्रम ने स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले के बाद यह जांच भी जरूरी हो गई है कि कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान ऐसे कितने संदिग्ध या कथित फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। दूसरी ओर, इस पूरे विवाद का राजनीतिक लाभ भाजपा को मिल सकता है, जिससे जिले के राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। सतीश/31 मई