देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद में रुड़की के निकट एक गांव है सढोली।इस गांव में अशोक कुमार शर्मा व उमा देवी ने यजमान बनकर तीन दिवसीय एक ऐसे वैदिक यज्ञ का आयोजन किया जिसमें आहुति देने के लिए सैकड़ो की संख्या में आर्यत्व से प्रेरित लोग शामिल हुए।दिल्ली से आए आर्य समाज के विद्वान आचार्य हरिप्रसाद ने जहां प्रतिदिन सुबह 8 से 12 बजे दोपहर तक और फिर शाम को साढ़े चार बजे से साढ़े सात बजे तक वेद ज्ञान पर चर्चा की और यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रतिदिन दोनों समय यज्ञ सम्पन्न कराया।आचार्य हरिप्रसाद ने कहा कि परमात्मा को भोग लगाने का सर्वोत्तम माध्यम यज्ञ है,यज्ञ में आहूत सामग्री ही भगवान तक पहुंचती है ,साथ ही यज्ञ से वातावरण शुद्धि होती है,जो हमारे पर्यावरण संतुलन का आधार है।आर्यत्व में रचे बसे अमित व सुमित के साथ ही वैज्ञानिक चंद्रकांत शर्मा की व्यवस्थाओं से सुसज्जित इस यज्ञ से तीन दिनों तक सढोली गांव में मंगल हुआ।दूर दराज से आए आर्य प्रेमियों ने चारों वेदों की ज्ञान चर्चाओं में भागीदारी की।जबकि चंदेना कोली से आए भजनोपदेशक अमरेश आर्य ने भगवान को समर्पित भजनों से सबका मन मोह लिया।उन्होंने हारमोनियम के संगीत और ढोलक की थाप पर अनेक भजन सुनाये, जिनकी मधुर आवाज़ में सब खोये रहे।इस यज्ञ में अपनी निष्ठा आहुति देने पहुंचे फ़िल्म निर्देशक डॉ सुभाष अग्रवाल ने महर्षि दयानंद के सत्यार्थ प्रकाश से लेकर स्वयं की लिखी पुस्तक हिंदी पत्रकारिता में महर्षि दयानंद का योगदान पर चर्चा की वही स्वयं के द्वारा निर्मित डाक्यूमेंट्री फ़िल्म स्वामी श्रद्धानंद व महर्षि दयानंद समेत अनेक फिल्मों को समाज के लिए प्रेरक बताया।इस अवसर पर उत्तराखंड के संस्कृत शिक्षा निदेशक रहे डॉ आनन्द भारद्वाज ने कहा कि वेद जीवन का आधार है ।उन्होंने शून्य व अनन्त की उत्तपत्ति का आधार भी वेद को ही बताया।उन्होंने वेद श्लोकों व संस्कृतनिष्ठ सम्बोधन से आर्य समाज व महर्षि दयानंद की समाज को राह दिखाने वाली सोच की सराहना की।कार्यक्रम में अंग्रेजी के प्रवक्ता रहे 90 वर्षीय आनन्द स्वरूप आर्य,रसायन विज्ञान के विद्वान 88 वर्षीय यशवीर सिंह ,पूर्व प्रधानाचार्य मानपाल सिंह आदि ने सढोली गांव से उठी वैदिक यज्ञ की लपटों को आध्यात्मिक अलख की संज्ञा दी। (लेखक विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ के उपकुलपति व आध्यात्मिक चिंतक है) ईएमएस / 01 जून 26