वाराणसी (ईएमएस)। ममता गुप्ता पत्नि मुरारीलाल गुप्ता ग्राम बहोरिपुर विकासखण्ड -हरहुआ, जनपद- वाराणसी की निवासी हैं | समूह से जुड़कर ममता ने अपनी जिंदगी में बड़े बदलाव किये हैं, जो ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाओं हेतु प्रेरणास्रोत के अलावा मिसाल भी है | उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर हजारों महिलाओं ने अपने जीवन में बदलाव लाया है। आज उन्हीं में से एक ममता गुप्ता। ममता के परिवार में 03 बच्चों सहित कुल 05 लोग हैं । हुनर की धनी ममता इंटर पास हैं । समूह से जुड़ने के पहले ममता घर पर ही रहती थीं एवं घरेलु कार्यों से समय मिलने पर अपने पति का हाथ बटाती थी | इनके पति पहले मूंगफली आदि का ठेला लगाते थे, जिससे परिवार की आजीविका चलती थी । समूह से 2019 में जुड़ने के बाद इन्होने अपनी छोटी- छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए कई बार ऋण लिया | समूह से ऋण लेकर इन्होने ने मकान मरम्मत एवं घर पर स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था भी की है | इनके समूह का नाम माँ लक्ष्मी है और ये समूह भी इनके लिए लक्ष्मी लेकर आया हो, इस तरह से इनके जीवन में बदलाव हुआ है | समूह से बड़ा ऋण लेकर इन्होने अपने पति की रजामंदी से केकव बेकरी की दुकान डाल दी है, जिसकी मांग आस पास खूब रहती हैं और इनकी आजीविका बढ़िया से चल रही है | दुकान पर ज्यादातर समय तो इनके पति ही बैठते हैं पर जब भी समय मिलता है ममता भी अपने दुकान को समय देती हैं | दुकान से औसतन प्रति माह लगभग 10 से 12 हजार रुपये की आमदनी हो जाती है। जब ममता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और इनके परिवार का गुजारा किसी तरह से हो रहा था तो ममता ने अपने लिए भी रोजगार अपने संकुल स्तरीय फेडरेशन के माध्यम से ढूढ़ लिया और बैंक सखी के रूप में चयनित होकर प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत अपनी सेवाएँ यूनियन बैंक ऑफ़ इण्डिया के वीरापट्टी शाखा में देने लगी | बैंक शाखा में बैंक सखी के रूप में बैंक आने वाले समूहों को खाता खुलवाने, जमा निकासी पेंशन बीमा आदि में सहयोग करती हैं | इससे भी इन्हें प्रति माह 5 से 6 हजार रुपये मासिक आमदनी हो जाती है। ममता अपने गावं एवं आस पास के गावं की ग्रामीण महिलाओं के लिए रोल माडल बनकर उभरी हैं जो गरीबी से बाहर आने एवं मेहनत लगन व ईमानदारी से किये गए प्रयासों से बदलाव की कहानी बयां करने का उदहारण बनी हैं। ये अपने तथा अन्य गावं की महिलाओं को रोजगार करने तथा बैंक की अन्य उत्पादों की जानकारी भी देती हैं जिससे उनके जीवन में भी बदलाव आये | बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहें हैं, पति के साथ परिवार को आगे बढ़ाने में सहयोग करते हुए ममता कहती हैं कि समूह से उन्हें समृद्धि का रास्ता मिला है | मेरी तरह अन्य बहने भी इसका फायदा उठायें एवं अपने जीवन में परिवर्तन लायें। राम नरसिंह/ईएमएस01/06/2026