क्षेत्रीय
01-Jun-2026


उत्तर बस्तर कांकेर (ईएमएस)। किसानों के लिए कम लागत में बेहतर और उन्नत फसल की पैदावार लेने में नैनो खाद श्रेष्ठ विकल्प साबित हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुसार पिछले वर्षों में जिले के किसानों ने नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग करके अच्छी फसल पैदावार ली है। कांकेर विकासखण्ड के ग्राम व्यासकोंगेरा के प्रगतिशील किसान निखिल साहू ने लगभग 20 एकड़ कृषि भूमि में पिछले दो वर्षों से अपनी फसलों में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का उपयोग शुरू किया है, जिससे उन्हें उल्लेखनीय लाभ मिला। उन्होंने बताया कि पहले उनके खेतों में धान का उत्पादन औसतन 30 से 35 क्विंटल प्रति एकड़ होता था, लेकिन नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के नियमित उपयोग से उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्तमान में उन्हें 39 से 40 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन प्राप्त हो रहा है। किसान श्री साहू ने यह भी बताया कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग करना बेहद आसान और सुविधाजनक है। इनका छिड़काव कीटनाशक अथवा फफूंदनाशक दवाओं के साथ मिलाकर भी किया जा सकता है। मात्र 500 मिलीलीटर की एक बोतल एक एकड़ क्षेत्र के लिए पर्याप्त होती है, जिससे भंडारण और परिवहन में भी सुविधा रहती है। इसके उपयोग के संबंध में बताया कि नैनो डीएपी धान की फसल लगने के लगभग 20 से 25 दिन बाद पहला छिड़काव तथा इसके 20 से 25 दिन बाद दूसरा छिड़काव किया जा सकता है। एक बार किए गए छिड़काव का प्रभाव लगभग 20 से 25 दिनों तक फसल पर बना रहता है, जिससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व निरंतर प्राप्त होते रहते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो सकती है, जबकि नैनो उर्वरकों का उपयोग छिड़काव के माध्यम से सीधे पौधों पर किया जाता है। इससे पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण होता है और भूमि पर प्रतिकूल प्रभाव की संभावना भी कम रहती है। उप संचालक कृषि ने बताया कि नैनो उर्वरक किसानों के लिए आधुनिक और प्रभावी विकल्प है। उन्होंने जिले के सभी किसान भाइयों से नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग की अपील करते हुए कहा कि इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उर्वरकों के बेहतर प्रबंधन में भी मदद मिलती है। यह सुविधाजनक, किफायती और पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प है। सत्यप्रकाश/चंद्राकर/1 जून 2026