राष्ट्रीय
01-Jun-2026


मुंबई,(ईएमएस)। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों पर हुए कथित हमलों को लेकर शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है। यूबीटी पार्टी ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में हमलों को जितना क्रूर, उतना ही कायरतापूर्ण करार दिया है। संपादकीय में दावा किया गया कि बीते दो दिनों में कोलकाता में घटी इन चौंकाने वाली घटनाओं ने न केवल पश्चिम बंगाल की, बल्कि पूरे देश की प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुंचाया है। सामना ने टिप्पणी की कि बंगाल को लंबे समय से भारत के सबसे सभ्य राज्यों में से एक माना जाता रहा है, लेकिन अब यह हिंसा, घृणा और भीड़तंत्र का प्रतीक बन गया है। संपादकीय में तर्क दिया गया कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल की, लेकिन जन कल्याण के लिए जनादेश का उपयोग करने के बजाय, वे राजनीतिक प्रतिशोध की अपनी चिरस्थायी खुमारी मिटाने में लगे हुए हैं। संपादकीय में विशेष रूप से टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और सांसद कल्याण बनर्जी पर हुए हमलों का जिक्र है। अभिषेक बनर्जी ने हेलमेट पहनने के कारण अपनी जान बचने का दावा कर एक सुनियोजित हत्या का प्रयास बताया। सामना में लिखा गया हैं कि अगर ममता बनर्जी के कार्यकाल में सांसदों पर इसतहर के हमले हुए होते, तब राज्यपाल तुरंत केंद्र सरकार को राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करते थे। हालांकि, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इन घटनाओं से पल्ला झाड़ते हुए जनाक्रोश करार दिया। लेकिन सामना ने इस तर्क को पूरी तरह अविश्वसनीय बताकर कहा कि यह सुनियोजित, संगठित गुंडागर्दी है, जिसका उद्देश्य या तब ममता की पार्टी को तोड़ना या बंगाल पर स्थायी रूप से गुंडों का शासन स्थापित करना है। भाजपा के पुराने आरोप को पलटते हुए संपादकीय ने पूछा कि यदि ममता बनर्जी के शासनकाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों ने आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया, तब मौजूदा भाजपा शासन में यह भयावह हिंसा कौन कर रहा है? संपादकीय ने कटाक्ष कर कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों की जगह अब तिलक लगाए गुंडों ने ले ली है। संपादकीय ने चौंकाने वाली बात बताई कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और राज्यपाल ने इन जानलेवा हमलों पर चुप्पी साध रखी है, जो यह इंगित करता है कि ये हमले राज्य प्रायोजित हैं और मौजूदा व्यवस्था के संरक्षण में अंजाम दिए गए हैं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने जन आक्रोश की आड़ में बंगाल में नव-हिंदुत्व की लहर पर सवाल उठाकर पूछा कि जब परीक्षा के प्रश्नपत्र लगातार लीक हो रहे हैं, ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं और महंगाई से आम लोगों की जिंदगी में असहनीय पीड़ा हो रही है,तब जनता इन मुद्दों पर आक्रोशित क्यों नहीं है? आशीष दुबे / 01 जून 2026