मंडला (ईएमएस)। स्वतंत्र रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी ने मित्र के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से पहुंचाया प्रतिवेदन, आदिवासियों की तकदीर बदलने वाली मिसिंग लिंक को संसद में उठाने की मांग, बिलासपुर-मंडला-जबलपुर रेल लाइन के पुनरीक्षण के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू को सौंपा ज्ञापन /बिलासपुर। महाकौशल (मध्य प्रदेश) और छत्तीसगढ़ के जनजातीय व आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों के आर्थिक कायाकल्प से जुड़ी सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना बिलासपुर-मुंगेली-पंडरिया-मंडला-जबलपुर (372 किमी) नई रेल लाइन को प्रशासनिक ठंडे बस्ते से बाहर निकालने के लिए जमीनी प्रयास तेज हो गए हैं। इस सिलसिले में स्वतंत्र रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी द्वारा तैयार किया गया एक उच्च स्तरीय विस्तृत मांग पत्र केंद्रीय आवास और शहरी मामले राज्य मंत्री तथा बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के माननीय सांसद तोखन साहू जी को उनके विशेष प्रतिनिधि (मित्र) के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से सौंपा गया है। औपचारिक पत्र (क्रमांक: SN/MP/2026/18) के जरिए रेल एक्टिविस्ट सोलंकी ने रेलवे बोर्ड द्वारा विगत दो दशकों से की जा रही प्रशासनिक अनदेखी और नीतिगत नियमों के उल्लंघन को प्रमुखता से उजागर किया है। पत्र में इस बात का कड़ा तकनीकी विरोध दर्ज किया गया है कि रेलवे बोर्ड के स्पष्ट आदेश (दिनांक 12.05.2004) के बावजूद, जिसमें इस योजना की हर 10 वर्ष बाद अनिवार्य समीक्षा (Review Survey) की जानी थी, वर्ष 2014 की तय समय-सीमा बीत जाने के 12 साल बाद भी आज तक कोई आधिकारिक पुनरीक्षण नहीं किया गया है। योजना की तकनीकी वस्तु स्थिति ब्रिटिश काल का इतिहास: वर्ष 1944 से लंबित इस परियोजना का प्रारंभिक इंजीनियरिंग-कम-ट्रैफिक सर्वे (PETS) 1997 में मंजूर हुआ था, जिसे 2003-04 में (-)5% ROR का हवाला देकर स्थगित कर दिया गया था। 100 किमी की क्रांतिकारी बचत: वर्तमान में जबलपुर से बिलासपुर के लिए गोंदिया मार्ग (517 किमी) या कटनी मार्ग (407 किमी) का उपयोग होता है। इसके मुकाबले यह सीधा मार्ग मात्र 372 किमी (आधुनिक संरेखण से 340 किमी) का होगा, जिससे समय और ईंधन दोनों बचेगा। 14% तक जा सकता है ROR: वर्ष 2016 के आंशिक सर्वे में ROR (+)1.73% था। वर्तमान माल ढुलाई, अमरकंटक-कान्हा के पर्यटन और औद्योगिक विकास को देखते हुए नया सर्वे होने पर इसके 12% से 14% सकारात्मक होने की पूरी संभावना है। अनिवार्य मिसिंग लिंक छत्तीसगढ़ में कटघोरा-पंडरिया-डोंगरगढ़ मार्ग पर रेल लाइन का कार्य पहले से ही प्रगति पर है, इसलिए यह लाइन अब एक अनिवार्य मिसिंग लिंक बन चुकी है। संसद सत्र में मुद्दा उठाने का विशेष अनुरोध मंत्री तोखन साहू को भेजे विशेष अनुरोध में यह अपील की गई है कि चूंकि वे स्वयं बिलासपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और इस परियोजना का एक मुख्य छोर बिलासपुर ही है, अतः आगामी संसद सत्र के दौरान लोकसभा में इस अत्यंत महत्वपूर्ण जनहितैषी और आदिवासी अंचल के विकास से जुड़े मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाएं। इस जन-आकांक्षा को रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड के समक्ष प्रभावी रूप से प्रस्तुत कर इसके Review Survey के आदेश जारी कराने एवं इसे National Priority Corridor घोषित करने की मांग की गई है। करोड़ों आदिवासियों की बदलेगी तकदीर विशेष चर्चा में स्वतंत्र रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी ने कहा कि यह रेल परियोजना केवल पटरियों का संजाल नहीं है, बल्कि महाकौशल और छत्तीसगढ़ के उन करोड़ों आदिवासियों की आर्थिक और सामाजिक तकदीर बदलने का माध्यम है जो पिछले 82 वर्षों से रेल कनेक्टिविटी की बाट जोह रहे हैं। हमें पूर्ण विश्वास है कि माननीय केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू जी इस विषय की गंभीरता को समझते हुए इसे संसद में अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएंगे। इस ऐतिहासिक पहल को व्यक्तिगत रूप से मंत्री जी के संज्ञान में लाने के बाद अब क्षेत्र के नागरिकों, व्यापारियों और रेल संरक्षकों में एक नई उम्मीद जगी है। ईएमएस/मोहने/ 01 जून 2026