ईंधन के बढ़ते दामों ने बढ़ाई मुश्किलें कीव,(ईएमएस)। एक तरफ जहां अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम बना हुआ है, वहीं दुनिया के दो अलग-अलग कोनों में जारी संघर्षों ने वैश्विक व्यवस्था और ऊर्जा बाजार को संकट में डाल दिया है। यूक्रेन ने रूस के भीतर गहराई तक घुसकर उसके तेल ढांचे को निशाना बनाया है, तो दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में इजरायल ने युद्धविराम के बावजूद लेबनान में अपने सैन्य अभियान को आगे बढ़ा दिया है। इन दोनों बड़ी सैन्य घटनाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अचानक हड़कंप मच गया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि उनकी सेना ने रूस के किरोव क्षेत्र में स्थित लाजारेवो ऑयल पंपिंग स्टेशन पर एक बड़ा हमला किया है। यह इलाका यूक्रेन की सीमा से लगभग 1287 किलोमीटर दूर रूस के भीतर स्थित है। इस ड्रोन हमले के बाद आसमान में धुएं के विशाल गुबार उठते देखे गए। किरोव के गवर्नर ने भी माना कि एक तेल सुविधा केंद्र इस हमले से प्रभावित हुआ है। यूक्रेनी राष्ट्रपति के अनुसार, उनका उद्देश्य रूस की युद्ध मशीनरी को ईंधन देने वाली मुख्य सप्लाई लाइनों को नष्ट करना है। इसके अतिरिक्त रूस के सारातोव की रिफाइनरी, रोस्तोव क्षेत्र और कैस्पियन सागर तट पर स्थित एक सैन्य अड्डे को भी निशाना बनाया गया है। रोस्तोव के एक ऑयल डिपो पर हुए हमले के बाद वहां आपातकाल घोषित करना पड़ा, जहां भीषण आग 4000 वर्ग गज से अधिक क्षेत्र में फैल गई। दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अप्रैल में घोषित युद्धविराम को करीब छह हफ्ते बीतने के बाद भी इजरायल ने लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई को और विस्तार देने का आदेश दिया है। हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच जारी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है और दोनों ओर से लगातार हमले किए जा रहे हैं। अमेरिका द्वारा दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता की मेजबानी किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति लगातार बिगड़ रही है, जिससे इस बात का खतरा बढ़ गया है कि ईरान एक बार फिर इस युद्ध में सीधे तौर पर कूद सकता है। इन दोनों मोर्चों पर भड़की युद्ध की आग का सबसे सीधा और बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में 2 फीसदी से ज्यादा का भारी उछाल दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड बढ़कर 93.05 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 89.53 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि लेबनान में संघर्ष और तेज होता है या होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल की आपूर्ति बाधित होती है, तो आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा संकट और अधिक गहरा सकता है। वीरेंद्र/ईएमएस 02 जून 2026