राष्ट्रीय
02-Jun-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। आयुष मंत्रालय लोगों को योग की ओर प्रेरित करने के लिए लगातार नई और महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर रहा है। विशेष रूप से मिर्गी (एपिलेप्सी) से पीड़ित लोगों के लिए मंत्रालय ने कुछ खास योगासनों की जानकारी दी है। इन आसनों का नियमित अभ्यास तंत्रिका तंत्र को शांत करने, तनाव को कम करने और मिर्गी के दौरे पड़ने की संभावना को घटाने में बेहद कारगर साबित हो सकता है। यह जानकारी उन लाखों लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो इस समस्या से जूझ रहे हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, मिर्गी एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसमें मस्तिष्क की विद्युतीय तरंगें प्रभावित होती हैं, जिससे बार-बार दौरे पड़ते हैं। मंत्रालय का मानना है कि दवाओं के साथ-साथ योग अभ्यास इस समस्या के प्रबंधन में बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। योग न केवल शरीर को, बल्कि मन को भी संतुलित रखता है, जिससे मिर्गी के मरीजों की जीवन गुणवत्ता बेहतर होती है। यह उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। मंत्रालय ने सलाह दी है कि इन आसनों को अपनी रोजाना की दिनचर्या में शामिल करके मिर्गी को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही, लोगों से अपील की है कि वे योग को अपनी जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा बनाएं, क्योंकि योग केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद आवश्यक है। नियमित योग अभ्यास न सिर्फ मिर्गी के दौरे को कम कर सकता है, बल्कि समग्र स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है, जिससे व्यक्ति अधिक ऊर्जावान और शांत महसूस करता है। मंत्रालय द्वारा बताए गए मुख्य योगासनों में उत्तानपादासन, भ्रामरी प्राणायाम, ताड़ासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन, वज्रासन और भुजंगासन शामिल हैं, जो मिर्गी के मरीजों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद हो सकते हैं। उत्तानपादासन आसन में पीठ के बल लेटकर पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाया जाता है। यह आसन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है, रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और तनाव को कम करने में मदद करता है। तनाव कम होने से नींद भी अच्छी आती है, जो मिर्गी के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है। भ्रामरी प्राणायाम में आंखें बंद करके म की ध्वनि के साथ सांस छोड़ी जाती है, जिससे भंवरे जैसी गूंज पैदा होती है। यह मस्तिष्क को शांत करता है, चिंता और तनाव को दूर करता है, और तंत्रिका तंत्र को स्थिर करता है। मिर्गी के मरीजों के लिए यह बहुत फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह दिमाग को शांत रखने में मदद करता है। ताड़ासन में खड़े होकर शरीर को पूरी तरह से तानकर यह अभ्यास किया जाता है। यह आसन एकाग्रता बढ़ाता है, शरीर की मुद्रा में सुधार करता है, और पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार करता है। यह शरीर को स्थिरता और संतुलन प्रदान करता है। अर्ध मत्स्येन्द्रासन से कमर और रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। यह पाचन तंत्र को भी ठीक रखता है और तंत्रिका तंत्र को संतुलित करता है, जिससे शरीर में सामंजस्य बना रहता है। वज्रासन भोजन के बाद भी किया जाने वाला यह एकमात्र आसन है, जो पाचन सुधारता है और मन को शांत रखता है। यह शरीर में रक्त संचार को भी बेहतर बनाता है। भुजंगासन छाती और फेफड़ों को खोलता है, जिससे श्वसन क्रिया बेहतर होती है। यह शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाता है और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करता है। सुदामा/ईएमएस 02 जून 2026