चुनाव चिन्ह भी पड़ सकता है खतरे में कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में सत्ता से बेदखल हुई टीएमसी अब अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। पार्टी के 50 विधायक पाला बदलने के लिए सौदेबाजी करते सुनाई दे रहे हैं। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा सोमवार को दो विधायकों को निष्कासित किए जाने के बाद से राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं कि टीएमसी के करीब 50 विधायक पार्टी से अलग हो सकते हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कई पार्षद लगातार अपने पदों से इस्तीफा दे रहे हैं और पार्टी के बड़े नेता आधिकारिक कार्यक्रमों से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। दो विधायकों के निष्कासन के बाद अब विधानसभा में टीएमसी के सदस्यों की संख्या घटकर 78 रह गई है। राजनीतिक हल्कों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि निष्कासित विधायक रीताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के नेतृत्व में एक नई तृणमूल का गठन किया जा सकता है, हालांकि अभी तक किसी भी नेता ने इस पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। दूसरी तरफ, राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी इन दोनों विधायकों का विशेष रूप से जिक्र किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, हावड़ा की उलुबेरिया पूर्व सीट से विधायक रीताब्रत बनर्जी और मध्य कोलकाता के एंटाली से विधायक संदीपन साहा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर ही विधानसभा सचिवालय ने विधायक दल के जाली हस्ताक्षर का मामला पुलिस में दर्ज कराया था। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि यह जांच किसी अन्य दल द्वारा शुरू नहीं की गई थी, बल्कि खुद टीएमसी के इन दो विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के सामने शिकायत दर्ज कराई थी। विधायकों का आरोप था कि विपक्ष के नेता के चयन से संबंधित बैठक में ऐसा कोई प्रस्ताव पारित ही नहीं हुआ था और 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत है। इस पूरे विवाद ने बंगाल की सियासत को बेहद संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है। तो महाराष्ट्र जैसी बन जाएगी स्थिति यदि टीएमसी के 50 विधायक अलग होकर एक नया गुट बनाते हैं, तो बंगाल में भी महाराष्ट्र जैसा राजनीतिक परिदृश्य देखने को मिल सकता है। जिस तरह महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में बड़ी बगावत के बाद मूल कप्तानों को अपनी ही पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न गंवाना पड़ा था, वैसी ही स्थिति यहाँ भी बन सकती है। टीएमसी नेतृत्व ने जिन दो विधायकों पर कार्रवाई की है, उन्हें भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने के बावजूद वे आधिकारिक बैठकों से लगातार नदारद रहे और खुद को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल किया। पार्टी उपाध्यक्ष द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि इन विधायकों के बयान और कदम संगठन के हितों के पूरी तरह खिलाफ थे, जिसके कारण उन्हें प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया गया। वीरेंद्र/ईएमएस/02जून2026