राज्य सरकारें जांच के जरिए वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी नई दिल्ली,(ईएमएस)। महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से शुरू की गई सरकारी योजनाएं अब पात्रता और पारदर्शिता के सवालों के घेरे में हैं। महाराष्ट्र में लाड़की बहिन योजना से करीब 80 लाख लाभार्थियों के नाम हटाए जाने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक बहस छिड़ गई है। वहीं पश्चिम बंगाल में भी लक्ष्मी भंडार योजना के तहत लाखों अपात्र लोगों के लाभ लेने का दावा किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं के लिए लाई गई इन योजनाओं का लाभ दोनों ही राज्यों में पुरुष भी ले रहे थे, जिसके बाद ये कदम उठाए गए हैं। दोनों राज्यों में सरकारें अब ई-केवाईसी, दस्तावेज सत्यापन और पात्रता की नई जांच के जरिए वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी हैं, जिससे इन महत्वाकांक्षी कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। बता दें महाराष्ट्र में प्रदेश सरकार की लाड़की बहिन योजना को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। राज्य सरकार ने अनिवार्य ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी न करने वाले करीब 80 लाख लाभार्थियों के खाते बंद कर दिए हैं। ये कार्रवाई योजना को लेकर आ रही शिकायत के बाद की गई है। इस योजना का फायदा अपात्र भी उठा रहे थे। जांच में सामने आया था कि कुछ पुरुष और सरकारी कर्मचारी भी गलत तरीके से 1500 रुपए की मासिक राशि ले रहे थे। इस धांधली को रोकने के लिए वेरिफिकेशन और ई-केवाईसी का अभियान शुरू किया गया था। वेरिफिकेशन में एक तकनीकी पेच भी फंसा। रिपोर्ट के मुताबिक मराठी भाषा में पूछे गए एक सवाल के गलत जवाब की वजह से करीब 24 लाख महिलाओं को सरकारी कर्मचारी मान लिया गया था। हालांकि, बाद में हुई जांच में इनमें से 20 लाख महिलाएं पूरी तरह पात्र पाई गईं थीं। प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में लाभार्थियों की संख्या कम होने को लेकर महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा केवल ई-केवाईसी लंबित रहने से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई अन्य कारण भी हैं। तटकरे ने बताया कि सरकार ने ई-केवाईसी के लिए शुरुआती समयसीमा तय की थी, जिसे बाद में कई बार बढ़ाया गया। कुल मिलाकर लाभार्थियों को करीब 8 से 10 महीने का समय दिया गया। उन्होंने कहा कि यह सत्यापन प्रक्रिया राज्य की सभी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजनाओं में अपनाई जाती है, केवल लाड़की बहिन योजना तक सीमित नहीं है। मंत्री तटकरे के मुताबिक पिछले 10 महीनों में किए गए डेटा सत्यापन में 11 से 12 लाख ऐसे लाभार्थी पाए गए, जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपए से ज्यादा है। इसके अलावा करीब 4.75 से 5 लाख महिलाएं 65 साल की आयु सीमा पार कर चुकी हैं, जिसके कारण वे योजना के दायरे से बाहर हो गईं। तटकरे ने बताया कि करीब 14 हजार सरकारी कर्मचारी भी लाभार्थियों की सूची में शामिल पाए गए थे, इसके अलावा कुछ ऐसे किसान भी चिन्हित किए गए हैं, जो अन्य योजनाओं का लाभ भी ले रहे थे। करीब 3.25 लाख लाभार्थियों के नाम पर पंजीकृत वाहन भी पाए गए हैं। वहीं, बीते हफ्ते पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने प्रदेश की लक्ष्मी भंडार को लेकर कहा था कि इस योजना का लाभ ले रहे कीरब 30 लाख लाभार्थी अपात्र हैं। इनमें से कई गैर-भारतीय हैं या उनके नाम वोटर लिस्ट से स्थायी रूप से हटाए जा चुके हैं। सीएम अधिकारी ने नई ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना के लिए आवेदन फॉर्म जारी किया था। उन्होंने कहा कि पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इस योजना के तहत अधिकारियों द्वारा आवेदन पत्रों का सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत आवेदन किया है या एसआईआर से जुड़े ट्रिब्यूनल में वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए अपील की है, वे इस योजना के पात्र होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को बड़ी संख्या में शिकायतें मिली थीं कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हट चुके हैं और जिन्होंने ट्रिब्यूनल या सीएए के तहत आवेदन नहीं किया, वे भी योजना का लाभ ले रहे थे। सरकार 1 जून से 90 दिनों तक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से नामांकन प्रक्रिया शुरु कर दी है। पंचायत क्षेत्रों में अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर फॉर्म भरवाने का अभियान भी शुरू किया जाएगा। सीएम अधिकारी ने दावा किया कि सत्यापन की कमी के कारण योजना में पुरुष लाभार्थियों के नाम भी शामिल हो गए थे। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं 2 जून तक सफलतापूर्वक नामांकन करा लेंगी, उन्हें अगले कैबिनेट बैठक के बाद डीबीटी के जरिए राशि भेजी जाएगी। सिराज/ईएमएस 02जून26