अंतर्राष्ट्रीय
03-Jun-2026


पश्चिम एशिया संकट के बीच बदले समीकरण तेहरान,(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और शांति वार्ता की अनिश्चितता के बीच पाकिस्तान और ईरान के रिश्तों में बढ़ती नजदीकियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं। लंबे समय तक एक-दूसरे पर अविश्वास रखने वाले दोनों पड़ोसी देशों के बीच हाल के महीनों में कूटनीतिक संपर्क बढ़े हैं, इससे क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। कटूनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिया बहुल ईरान और सुन्नी बहुल पाकिस्तान के बीच वैचारिक और रणनीतिक मतभेद लंबे समय से मौजूद रहे हैं। दोनों देशों के संबंधों में कई बार तनाव भी देखने को मिला है। जनवरी 2024 में दोनों देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी। ईरान ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया था, जबकि पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई की थी। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में दोनों देश संवाद और सहयोग का रास्ता तलाशते नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती सक्रियता और अमेरिका के साथ उनके संपर्कों ने पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका को नई पहचान दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखने की कोशिश की है। साथ ही वह चीन के साथ अपने पारंपरिक रणनीतिक संबंधों को भी मजबूत बनाए हुए है। इसी बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने पाकिस्तान को एक संभावित मध्यस्थ की भूमिका में ला खड़ा किया है। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान भी मौजूदा संघर्ष से निकलने के लिए विभिन्न कूटनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहा है। ऐसे में पाकिस्तान के साथ संवाद बढ़ाना उसके लिए एक व्यावहारिक कदम माना जा सकता है। हालांकि दोनों देशों के बीच पुराना अविश्वास पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और संबंधों की दिशा आने वाले समय की क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। पश्चिम एशिया में बदलते घटनाक्रमों के बीच ईरान और पाकिस्तान की यह नई नजदीकी क्षेत्रीय राजनीति और कूटनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है। आशीष दुबे / 03 जून 2026