क्षेत्रीय
03-Jun-2026
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:: 14.40 लाख रू. के ऋण से शुरू किया इलेक्ट्रॉनिक्स का व्यवसाय; रोजगार तलाशने वाले युवा अब बने रोजगारदाता :: झाबुआ/इंदौर (ईएमएस)। जीवन में सफलता सिर्फ बड़े संसाधनों से ही नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से प्राप्त होती है। यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखकर निरंतर प्रयास करे, तो परिस्थितियां कभी बाधा नहीं बनतीं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है इन्दौर संभाग के झाबुआ जिले के निवासी प्रेम गामड़ की, जिन्होंने शासकीय योजना के माध्यम से स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल पेश की है। स्नातक (ग्रेजुएशन) तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद मंजेश गामड़ के पुत्र प्रेम गामड़ ने निजी क्षेत्र में नौकरी करना प्रारंभ किया था। नौकरी से आजीविका तो चल रही थी, लेकिन उनके मन में हमेशा से स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने का सपना था। इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के प्रति गहरी रुचि और तकनीकी समझ के कारण उन्होंने इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने का निर्णय लिया, परंतु नया काम शुरू करने के लिए आवश्यक पूंजी की व्यवस्था करना उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी। :: योजना के तहत मिला 14.40 लाख रुपये का ऋण :: पूंजी के संकट के बीच प्रेम गामड़ ने जिला आदिवासी वित्त एवं विकास निगम, झाबुआ के कार्यालय से संपर्क किया। वहां उन्हें भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना की जानकारी मिली और अधिकारियों के मार्गदर्शन में उनका ऋण प्रकरण तैयार कर बैंक ऑफ बड़ौदा को भेजा गया। बैंक द्वारा सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद प्रेम के लिए 14.40 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। :: बनी नई पहचान, एक अन्य को भी दिया रोजगार :: ऋण राशि प्राप्त होते ही प्रेम ने इलेक्ट्रॉनिक्स सेल्स एंड सर्विस का व्यवसाय पूरी लगन के साथ प्रारंभ किया। आज उनका यह काम पूरे क्षेत्र में अपनी खास पहचान बना चुका है और वे इसके माध्यम से हर महीने लगभग 1.50 लाख रुपये की शानदार आय अर्जित कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ उन्होंने अपनी इस व्यावसायिक इकाई में एक अन्य स्थानीय व्यक्ति को रोजगार प्रदान कर उसे भी आजीविका दी है। :: युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत :: प्रेम गामड़ बताते हैं कि एक समय वे स्वयं रोजगार के लिए परेशान थे, लेकिन आज वे एक सफल व्यवसायी बन चुके हैं। वे अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम तथा भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना को देते हैं। प्रेम का कहना है कि शासन की ये योजनाएं युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर हैं। यदि सही जानकारी और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी युवा नौकरी के पीछे भागने के बजाय खुद की नई पहचान बना सकता है।