- कर्मचारी चयन बोर्ड पर भविष्य से खिलवाड़ का आरोप भोपाल (ईएमएस)। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार बोर्ड पर छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगा है। दरअसल, बोर्ड ने आगामी 6 जून को उन परीक्षाओं की तारीख तय कर दी है, जिस दिन पहले से ही एक अन्य राष्ट्रीय स्तर की बड़ी परीक्षा निर्धारित है। एक ही दिन दो महत्वपूर्ण परीक्षाएं होने के कारण हजारों अभ्यर्थियों के सामने ‘धर्मसंकट’ खड़ा हो गया है और वे परेशान हो रहे हैं। पूरा मामला मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड और नेशनल एंट्रेंस स्क्रीनिंग टेस्ट की परीक्षाओं से जुड़ा है। ये दोनों ही परीक्षाएं आगामी 6 जून को आयोजित होने जा रही हैं। एक ही दिन और एक ही समय पर दो अलग-अलग परीक्षाओं का शेड्यूल होने के कारण छात्र यह तय नहीं पा रहे हैं कि वे कौन सी परीक्षा देने जाएं और कौन सी छोड़ें। छात्रों का आरोप है कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले नेशनल इंस्टीट्यूट स्क्रीनिंग टेस्ट ने अपनी परीक्षा की तारीख दिसंबर 2025 में ही सार्वजनिक कर दी थी। इसके बावजूद, मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड ने लापरवाही बरतते हुए जानबूझकर 6 जून को ही अपनी परीक्षाओं की तारीख भी घोषित कर दी। बोर्ड के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण छात्रों में भारी आक्रोश है। इस विसंगति को लेकर जबलपुर की एक छात्रा ने मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड को एक पत्र भेजकर परीक्षा की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है। पत्र में मुख्य रूप से वनरक्षक, जेल प्रहरी और क्षेत्र रक्षक भर्ती परीक्षा की तारीखों में बदलाव करने का आग्रह किया गया है, ताकि छात्र दोनों परीक्षाओं में शामिल हो सकें। एक परीक्षा चुनने के लिए विवश हो रहे छात्र मध्य प्रदेश के हजारों छात्र-छात्राओं ने इन दोनों ही परीक्षाओं के लिए लंबे समय से कड़ी तैयारी की है। दोनों परीक्षाओं का अपना अलग महत्व है, लेकिन तारीखों के टकराव के चलते अब छात्र किसी एक परीक्षा को चुनने और दूसरी को छोडऩे के लिए मजबूर हो रहे हैं। छात्रों का कहना है कि उनकी महीनों की मेहनत और पैसे दोनों बर्बाद होने की कगार पर हैं। अब प्रदेश के युवाओं ने मुख्यमंत्री और बोर्ड के उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई है कि मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड की परीक्षा की तारीख को आगे बढ़ाया जाए, ताकि किसी भी युवा का भविष्य प्रभावित न हो। विनोद / 04 जून 26