राज्य
04-Jun-2026


-अब जॉब कार्ड की मांग, बेरोजगारी भत्ता, लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत नहीं मिलेंगी भोपाल (ईएमएस)। मध्य प्रदेश में लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत मिलने वाली कई सेवाओं के स्वरूप में बड़ा बदलाव किया गया है। विभिन्न योजनाओं में संशोधन तथा विभागों द्वारा ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराए जाने के कारण पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की 14 सेवाओं को लोक सेवा गारंटी के दायरे से बाहर कर डीनोटिफाई कर दिया गया है। लोक सेवा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार दोनों विभागों की सात-सात सेवाओं को गारंटी अधिनियम से हटाया गया है। इनमें मनरेगा से संबंधित जॉब कार्ड की मांग, रोजगार की मांग, बेरोजगारी भत्ता तथा मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना के पंजीयन जैसी सेवाएं शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार योजनाओं के संचालन के तरीके में बदलाव और ऑनलाइन प्रक्रिया लागू होने के कारण इन सेवाओं को लोक सेवा गारंटी से हटाया गया है। हालांकि संबंधित विभागों द्वारा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती रहेंगी। ये सेवाएं हटाई गई पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की जो संवाएं हटाई गई हैं उनमें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना (ग्रामीण क्षेत्र) के अंतर्गत भुगतान, मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना (ग्रामीण क्षेत्र) के अंतर्गत भुगतान, जॉब कार्ड की मांग, मनरेगा के तहत रोजगार की मांग, रोजगार उपलब्ध नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता, मस्टर रोल के अनुसार मजदूरी भुगतान आदेश जारी करना और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा अंतर्गत लोक प्रयोजन के लिए सडक़ काटने की सशर्त अनुमति शामिल हैं। वहीं सामाजिक न्याय विभाग की जो सेवाएं हटाई गई हैं उनमें मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में पंजीयन एवं लाभ प्राप्ति, मुख्यमंत्री निकाह योजना में पंजीयन, मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना के अंतर्गत विभिन्न सहायता प्रकरण, मजदूर सुरक्षा योजना में पंजीयन, मजदूर सुरक्षा योजना के पंजीयन का नवीनीकरण, वृद्धाश्रमों एवं संबंधित संस्थाओं के लिए अनुदान प्रस्तावों की अनुशंसा और वृद्धाश्रम संचालन एवं अनुरक्षण के लिए अनुदान संबंधी प्रस्तावों की जिला स्तर पर अनुशंसा शामिल हैं। अब भी 729 सेवाएं गारंटी के दायरे में लोक सेवा प्रबंधन विभाग के अनुसार वर्तमान में लगभग 729 सेवाएं लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत संचालित हैं। विभिन्न विभागों की केवल 48 सेवाएं ऐसी हैं जो अभी इस व्यवस्था में शामिल नहीं हैं। विभाग ने संबंधित विभागों से कहा है कि यदि कोई सेवा अब प्रासंगिक नहीं है तो उसे औपचारिक रूप से डीनोटिफाई कराया जाए। वहीं जिन सेवाओं की आवश्यकता बनी हुई है, उनके लिए ऑनलाइन एवं समयबद्ध सेवा वितरण की व्यवस्था विकसित की जाए। समय सीमा में सेवा नहीं देने पर कार्रवाई मध्य प्रदेश में नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2010 में लोक सेवा गारंटी अधिनियम लागू किया गया था। इसके तहत प्रत्येक सेवा के लिए निर्धारित समय सीमा तय की गई है। यदि तय अवधि में सेवा उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो संबंधित अधिकारी पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य अधिकतम सेवाओं को ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराना है, ताकि नागरिकों को प्रमाण-पत्र, अनुमतियां और अन्य सरकारी कार्यों के लिए कार्यालयों के बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें। लोक सेवा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव अरुण परमार के अनुसार लोक सेवा गारंटी के दायरे से बाहर सेवाओं की समीक्षा की जा रही है और विभागों को उन्हें ऑनलाइन एवं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। विनोद / 04 जून 26