फुटपाथ जायेंगे किराए पर, सड़कों पर लगेगा पार्किंग टैक्स जबलपुर (ईएमएस)। शहर में लगातार बढ़ते यातायात दबाव और पार्किंग की समस्या के बीच नगर निगम प्रशासन ने एक ऐसा रास्ता चुना है, जिस पर अब सवाल उठने लगे हैं। आम नागरिकों की सुविधा के लिए बनाई गई सड़कें और फुटपाथ अब नगर निगम के लिए कमाई का जरिया बनने जा रहे हैं। निगम प्रशासन शहर के सात प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में सड़कों और फुटपाथों को पेड पार्किंग में बदलने की तैयारी कर रहा है। इस योजना के लागू होने के बाद नागरिकों को न केवल वाहन खड़ा करने के लिए शुल्क देना होगा, बल्कि कई स्थानों पर पैदल चलने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं बचेगी। जानकारी के अनुसार नगर निगम से महापौर बंगले तक, सतना बिल्डिंग के सामने का क्षेत्र, मॉडल रोड स्थित सेंट नॉर्बर्ट स्कूल साइड, निगम मुख्यालय के सामने सिविक सेंटर, समदड़िया मॉल के तीनों ओर, श्याम टॉकीज से गोलबाजार तक और गोलबाजार के आसपास की सड़कें एवं फुटपाथ इस योजना में शामिल किए गए हैं। इन इलाकों में प्रतिदिन हजारों लोग खरीदारी, व्यवसाय और अन्य कार्यों के लिए पहुंचते हैं। सुविधा से ज्यादा राजस्व बढ़ाने पर जोर … नगर निगम का तर्क है कि शहर के मुख्य बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था बनाने के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या सड़कों और फुटपाथों को पार्किंग में बदलना ही एकमात्र विकल्प है? शहर के नागरिकों का मानना है कि जिन सड़कों का निर्माण जनता के टैक्स के पैसे से हुआ, उनका उद्देश्य यातायात को सुगम बनाना और राहगीरों को सुरक्षित रास्ता देना था। अब उन्हीं सार्वजनिक संसाधनों का व्यावसायिक उपयोग कर उनसे शुल्क वसूला जाएगा। इससे यह धारणा मजबूत हो रही है कि निगम प्रशासन नागरिक सुविधाओं के विस्तार के बजाय राजस्व बढ़ाने पर अधिक ध्यान दे रहा है। पैदल चलने वालों के लिए बढ़ेगी मुश्किल … विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से ही अतिक्रमण, अव्यवस्थित पार्किंग और ट्रैफिक जाम से जूझ रहे बाजार क्षेत्रों में सड़क के हिस्से को पेड पार्किंग में बदलना समस्या को और गंभीर बना सकता है। गोलबाजार, सिविक सेंटर और समदड़िया मॉल जैसे क्षेत्रों में वर्तमान में भी कई बार पैदल चलने वालों को सड़क पर उतरकर चलना पड़ता है क्योंकि फुटपाथों पर या तो अतिक्रमण है या वाहन खड़े रहते हैं। यदि इन्हीं क्षेत्रों में अधिकृत पेड पार्किंग शुरू हो जाती है तो राहगीरों के लिए सुरक्षित आवाजाही और कठिन हो सकती है। निगम की खाली जमीनें कहां गईं…? योजना का सबसे बड़ा विरोध इस बात को लेकर हो रहा है कि निगम प्रशासन अपनी उपलब्ध जमीनों और परिसंपत्तियों का समुचित उपयोग करने में विफल रहा है। शहर में कई ऐसे भूखंड और संपत्तियां मौजूद हैं जिनका उपयोग बहुस्तरीय पार्किंग या समर्पित पार्किंग जोन विकसित करने के लिए किया जा सकता है। शहरी विकास से जुड़े जानकारों का कहना है कि किसी भी विकसित शहर में सड़कों को स्थायी पार्किंग में बदलने के बजाय ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग, मल्टीलेवल पार्किंग और स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाती है। जबकि यहां सड़कों और फुटपाथों को ही राजस्व स्रोत बनाने की तैयारी दिखाई दे रही है। सुनील साहू / शहबाज / 04 जून 2026/ 05.52