राष्ट्रीय
05-Jun-2026
...


-15 से 17 जून तक फ्रांस में होगा सम्मेलन -संघर्षों के बीच ट्रंप का वैश्विक नेताओं से आमने-सामने बातचीत का यह पहला बड़ा अवसर नई दिल्ली,(ईएमएस)। इस महीने फ्रांस में होने जा रहा जी7 शिखर सम्मेलन वैश्विक कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि कर दी है। इसके साथ ही इस वैश्विक मंच पर पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच मुलाकात की उम्मीदें बढ़ गई हैं। यह शिखर सम्मेलन 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में आयोजित होगा। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्षों के बीच ट्रंप के लिए वैश्विक नेताओं से आमने-सामने बातचीत करने का यह पहला बड़ा अवसर होगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि मैं जी7 शिखर सम्मेलन के लिए फ्रांस जाऊंगा। यह यात्रा व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में होने वाली यूएफसी के ठीक बाद होगी, जो अमेरिकी इतिहास की सबसे मनोरंजक रातों में से एक होगी। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड बताते हैं कि व्हाइट हाउस के लंबे और गौरवशाली इतिहास में पहले भी कई बार काफी निचले स्तर की फाइट्स हुई हैं, लेकिन जनता के घर में दुनिया के सबसे महान फाइटर्स जो सभी चैंपियन हैं उनके बीच होने वाली इस तरह की फाइट के बारे में पहले कभी सोचा भी नहीं गया था। रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने इस बात का स्वागत किया कि पीएम मोदी ने एवियन शिखर सम्मेलन में अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है। इसे ध्यान में रखते हुए दोनों मंत्रियों ने जी7 के कार्यों में भारत के योगदान पर जोर दिया, विशेष रूप से प्रमुख व्यापक आर्थिक असंतुलन, अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी और एकजुटता से जुड़े मुद्दों पर। पीएम मोदी और ट्रंप की मुलाकात पिछले साल फरवरी में हुई थी, जब पीएम मोदी अमेरिका के दौरे पर थे, लेकिन उसके बाद से ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ़, व्यापार समझौते और नई दिल्ली द्वारा रूसी तेल की खरीद को लेकर वॉशिंगटन की आलोचनाओं के कारण भारत और अमेरिका के संबंधों में कुछ खटास आ गई थी। हालांकि पीएम मोदी और ट्रंप फोन पर बातचीत के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में रहे। जानकारों का मानना ​​है कि यह मुलाकात वॉशिंगटन और नई दिल्ली को अपने रिश्तों को फिर से ठीक करने का मौका दे सकती है और व्यापार समझौते को लेकर कोई बड़ी सफलता मिल सकती है, उनका मानना ​​है कि यह समझौता अभी अटका है। विदेश मामलों के जानकार ने कहा कि यह अमेरिकी पेचीदगियों की वजह से अटका है। ट्रंप ने प्रतिबंधों के लिए जो टैरिफ लगाए थे... अदालतों ने उन्हें हटा दिया है। अब वह किसी और तरह के टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक अलग से बातचीत से आपसी समझ को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। सिराज/ईएमएस 05 जून 2026