नई दिल्ली (ईएमएस)। रक्तदान करने से शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती है, फिर भी समाज में आज भी बड़ी संख्या में लोग रक्तदान करने से बचते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर कर दें, तो देश में रक्त की कमी की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है। एक यूनिट रक्त सड़क दुर्घटना के शिकार मरीजों, बड़ी सर्जरी से गुजर रहे लोगों, प्रसव के दौरान महिलाओं और थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की जान बचाने में मदद कर सकता है। इसी कारण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन लगातार लोगों से स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, बहुत से लोग यह मानते हैं कि रक्तदान करने से शरीर कमजोर हो जाता है या लंबे समय तक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। कुछ लोगों को यह डर भी रहता है कि शरीर में रक्त की कमी पूरी होने में काफी समय लग जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह पूरी तरह गलत धारणा है। एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है और शरीर कुछ ही समय में दान किए गए रक्त की भरपाई कर लेता है। रक्तदान से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि कई मामलों में इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी भी माना जाता है। नियमित रक्तदान से शरीर में रक्त कोशिकाओं के निर्माण की प्रक्रिया सक्रिय बनी रहती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार, 18 से 65 वर्ष तक की आयु का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। रक्तदाता के शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम से कम 12.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर होना चाहिए। साथ ही उसका रक्तचाप सामान्य होना और वजन न्यूनतम 45 किलोग्राम होना जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को हाल ही में कोई संक्रमण हुआ हो या वह टीबी, कैंसर, एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो, तो उसे रक्तदान नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और हाल में बड़ी सर्जरी करा चुके लोग भी अस्थायी रूप से रक्तदान के लिए अयोग्य माने जाते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, रक्तदान से पहले डोनर की पूरी स्वास्थ्य जांच की जाती है, जिसमें हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर और अन्य सामान्य परीक्षण शामिल होते हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि रक्तदाता पूरी तरह स्वस्थ है और उसका रक्त मरीज के लिए सुरक्षित रहेगा। पूरी प्रक्रिया में केवल कुछ मिनट लगते हैं और इससे शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। पुरुष हर तीन महीने और महिलाएं हर चार महीने में सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकती हैं। देश में हर साल लाखों मरीजों को रक्त की जरूरत पड़ती है। सड़क दुर्घटनाएं, जटिल ऑपरेशन, कैंसर और प्रसव संबंधी आपात स्थितियों में समय पर रक्त मिलना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदान समाज के लिए बड़ी मदद साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न संस्थाएं लगातार जागरूकता अभियान चला रही हैं और स्कूलों, कॉलेजों तथा अन्य संस्थानों में रक्तदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। सुदामा/ईएमएस 05 जून 2026