क्षेत्रीय
05-Jun-2026
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- जगतपुर कोशी नगर बांध पर फैल रहा प्रदूषण मधुबनी, (ईएमएस)। एक ओर विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और हरित विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर शहर का कचरा जगतपुर-कोसी नहर बांध क्षेत्र में डंप कर पर्यावरण को गंभीर संकट की ओर धकेला जा रहा है। नगर निगम द्वारा लगातार फेंके जा रहे ठोस अपशिष्ट से आसपास के ग्रामीणों का जीवन दुश्वार हो गया है। दुर्गंध, प्रदूषण और बीमारियों के खतरे के बीच स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो नगर निगम और न ही जिला प्रशासन इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम उठा रहा है। - कचरे के ढेर से दम तोड़ रही पर्यावरण सुरक्षा की बातें विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहां पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं जगतपुर कोसी नहर बांध क्षेत्र की स्थिति इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर रही है। नगर निगम द्वारा शहर से एकत्रित कचरे को खुले में डंप किए जाने से इलाके में कचरे का विशाल ढेर जमा हो गया है। गर्मी के मौसम में इससे उठने वाली दुर्गंध के कारण आसपास के गांवों के लोगों का घरों में रहना तक मुश्किल हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कचरे से निकलने वाला दूषित गंदगी आसपास की जमीन और जलस्रोतों को भी प्रभावित कर रहा है। इससे खेती योग्य भूमि की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार खुले में कचरा डंप करने से वायु, जल और मिट्टी तीनों प्रकार का प्रदूषण बढ़ता है, जिसका दीर्घकालिक प्रभाव मानव स्वास्थ्य और जैव विविधता पर पड़ता है। - बीमारियों का बढ़ रहा खतरा कचरे के ढेर पर बड़ी संख्या में मक्खियां, मच्छर और आवारा पशु मंडराते रहते हैं। इससे डेंगू, मलेरिया, त्वचा रोग तथा श्वसन संबंधी बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। - शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई ग्रामीणों के अनुसार नगर निगम और जिला प्रशासन को कई बार लिखित एवं मौखिक शिकायतें दी गई हैं। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का ध्यान भी इस ओर आकृष्ट कराया गया। लेकिन अब तक समस्या का कोई समाधान नहीं निकला है। लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों पर संकट गहराता जा रहा है। - पर्यावरण दिवस पर उठे सवाल विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब पर्यावरण संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तब खुले में कचरा डंप कर प्राकृतिक संसाधनों को प्रदूषित होने से बचाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में यह क्षेत्र गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट का केंद्र बन सकता है। - ग्रामीणों की प्रमुख मांगें जगतपुर कोसी नहर बांध क्षेत्र में कचरा डंपिंग तत्काल बंद की जाए,वैज्ञानिक तरीके से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था लागू हो, प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों की जांच कराई जाए, पर्यावरणीय प्रभाव का स्वतंत्र आकलन कराया जाए, कचरा निस्तारण के लिए आबादी से दूर उपयुक्त स्थान चिन्हित किया जाए। विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधे लगाने और संरक्षण के संकल्प लिए जाएंगे, भाषण होंगे और जागरूकता रैलियां निकलेंगी। लेकिन जगतपुर कोसी नहर बांध पर फैले कचरे के ढेर यह पूछ रहे हैं कि क्या पर्यावरण बचाने की जिम्मेदारी केवल आम लोगों की है, या फिर प्रशासन और नगर निगम को भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा? पर्यावरण संरक्षण की असली परीक्षा भाषणों में नहीं, बल्कि ऐसी समस्याओं के समाधान में है। कार्तिक कुमार/संतोष झा- ०५ जून/२०२६/ईएमएस