05-Jun-2026
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- 25.64 लाख से अधिक आगंतुकों ने लिया विज्ञान और तकनीक का अनुभव, हजारों स्कूल जुड़े मिशन से - स्पेस ऑब्जर्वेटरी से लेकर एआई-रोबोटिक्स तक, गुजरात के साइंस सेंटर बन रहे भविष्य की प्रयोगशालाएँ गांधीनगर (ईएमएस)| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने 12 वर्ष पूरे किए हैं। इन बारह वर्षों में गुजरात ने विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नई ऊंचाईयों को पार किया है। राज्य में पिछले 12 वर्षों में विज्ञान के प्रसार और जनमानस में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए 4 रीजनल साइंस सेंटर स्थापित किए गए हैं, जिनका अब तक 25.64 लाख से अधिक विज्ञानप्रेमी मुलाकात कर चुके हैं। गुजरात काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (जीयूजेसीओएसटी) द्वारा राज्य में स्थापित किए गए रीजनल साइंस सेंटर आगंतुकों के लिए मानो जीवंत प्रयोगशाला बन गए हैं। उत्तर गुजरात में पाटण, सौराष्ट्र में राजकोट, भावनगर तथा कच्छ में स्थापित ये रीजनल साइंस सेंटर विभिन्न क्षेत्रों के शहरी और ग्रामीण इलाकों में विज्ञानप्रेमियों की जिज्ञासा को संतुष्ट कर रहे हैं। रीजनल साइंस सेंटर, पाटण : उत्तर गुजरात में वैज्ञानिक क्रांति का एपिसेंटर गुजरात स्थापना दिवस 1 मई, 2022 के अवसर पर पाटण साइंस सेंटर का लोकार्पण किया गया। उत्तर गुजरात के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के नागरिकों के बीच इस केंद्र ने विशेष आकर्षण पैदा किया है। शिक्षा के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध पाटण स्थित इस साइंस सेंटर का अब तक लगभग 14.86 लाख से अधिक विज्ञानप्रेमी मुलाकात कर चुके हैं। इस रीजनल सेंटर ने 2700 से अधिक स्कूलों को जोड़ते हुए 7 लाख से अधिक विद्यार्थियों और नागरिकों को विज्ञान अभिमुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उल्लेखनीय है कि इस सेंटर ने विज्ञान ग्राम सभा जैसी पहल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं, किसानों और दिव्यांगजनों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित कर विज्ञान को समावेशी बनाया है। इस केंद्र के बारे में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एनएचएम, गांधीनगर के तत्कालीन मिशन निदेशक जे. सी. पंड्या ने कहा, “पाटण रीजनल साइंस सेंटर अपनी अद्भुत और ज्ञानवर्धक गैलरियों के माध्यम से विज्ञानप्रेमियों को उत्कृष्ट अनुभव प्रदान कर रहा है।” वर्ष 2025 में नेशनल एनर्जी कन्जर्वेशन अवोर्ड प्राप्त करने वाले इस केंद्र में 200 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित कर टिकाऊ विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई गई है। पाटण रीजनल साइंस सेंटर बना विज्ञान का उद्दीपक • 890 से अधिक वर्कशोप • 579 वैज्ञानिक व्याख्यान मालाएं • 1,900 से अधिक विज्ञान शो • डीएनए, रोबोटिक्स, हाइड्रोपोनिक्स और मेकाट्रॉनिक्स के हैंड्स-ऑन पाठ्यक्रम भुज रीजनल साइंस सेंटर – सीमा तक पहुंची विज्ञान की ज्योत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करकमलों द्वारा 28 अगस्त, 2022 को इसका लोकार्पण किया गया। भुजिया डूंगर की तलहटी में स्थित इस केंद्र का मुलाकात 1,100 से अधिक विद्यालयों के 1.37 लाख से अधिक विद्यार्थी कर चुके हैं। आज तक लगभग 2.57 लाख से अधिक देश-विदेश के नागरिक इसकी यात्रा कर चुके हैं, जिनमें नाइजीरिया, ऑस्ट्रेलिया, यूएसए और सऊदी अरब जैसे देशों के पर्यटक भी शामिल हैं। यहां 6 अद्भुत गैलरियां, 3डी मूवी, मरीन तथा सबमरीन सिम्युलेटर उपलब्ध हैं। यह केंद्र बच्चों के लिए भी विभिन्न गतिविधियां संचालित करता है। यहां आयोजित समर वर्कशॉप में 2,500 से अधिक बच्चों को फन विद फिजिक्स, एस्ट्रोनॉमी, मेंटल मैथ्स और ओरिगामी से परिचय विकसित करने का अवसर प्रदान किया गया। 25 दिसंबर, 2024 के दिन यहां भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्पेस ऑब्जर्वेटरी का उद्घाटन किया गया, जहां 24 इंच की दूरबीन के माध्यम से अब तक 3,500 से अधिक नागरिकों ने अंतरिक्ष के रहस्यों को जानने का प्रयास किया है। रीजनल साइंस सेंटर, भावनगर : सौराष्ट्र में अनुभव आधारित शिक्षा का ग्रीन मॉडल 29 सितंबर, 2022 को भावनगर में प्रारंभ हुआ यह रीजनल साइंस सेंटर 20 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। अब तक लगभग 2.90 लाख से अधिक विद्यार्थी और नागरिक इसकी यात्रा कर चुके हैं। यहां मरीन, ऑटोमोबाइल, बायोलॉजी, इलेक्ट्रो-मैकेनिक्स तथा नोबेल पुरस्कार विषयक पांच गैलरियां उपलब्ध हैं। विज्ञानप्रेमी श्री परेश आर. सरवैया के अनुसार, यहां विभिन्न गैलरियों का रखरखाव अत्यंत उत्कृष्ट है तथा स्टाफ भी प्रभावी मार्गदर्शन प्रदान करता है। इन गैलरियों में 9डी वर्चुअल रियलिटी सिम्युलेटर, विशाल एक्वेरियम, पीजो-इलेक्ट्रिक फ्लोर तथा इंटरैक्टिव पजल जोन मौजूद हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप एसटीईएम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स तथा शिक्षक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने वाला यह केंद्र 100 किलोवाट सोलर प्लांट और जीरो वॉटर वेस्ट व्यवस्था के साथ सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त ग्रीन कैंपस का दर्जा प्राप्त कर चुका है। राजकोट रीजनल साइंस सेंटर: इनोवेशन और फ्यूचरिस्टिक टेक्नोलॉजी का हब 19 अक्टूबर, 2022 को लोकार्पित राजकोट रीजनल साइंस सेंटर में ‘हाउ स्टफ वर्क्स’, रोबोटिक्स, मशीन इंजीनियरिंग, ग्लास एंड सिरामिक्स, नोबेल पुरस्कार तथा लाइफ साइंस जैसी 6 थीम आधारित गैलरियां हैं। लगभग 1.67 लाख से अधिक विद्यार्थियों तथा 3.64 लाख से अधिक आगंतुकों ने यहां विज्ञान जगत के रहस्यों को जाना और समझा है। कैंपस में ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर), वर्चुअल रियलिटी (वीआर), होलोग्राम और सिम्युलेशन जोन के माध्यम से बच्चों को ड्रोन टेक्नोलॉजी तथा एसटीईएम कार्यशालाओं जैसी नेक्स्ट जनरेशन टेक्नोलॉजी का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस प्रकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 12 वर्षों के राष्ट्रीय नेतृत्व तथा मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के नेतृत्व में गुजरात ज्ञान और विज्ञान के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। सतीश/05 जून