श्रीराम की सेना धर्म, सत्य, त्याग और मर्यादा का प्रतीक है तो वही रावण कि सेना अहंकारी है : मुनि श्री सुधासागर जी गुना (ईएमएस) गुना। राष्ट्रीय संत निर्यापक मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज जी के सानिध्य मे गुना मे होने जा रहे ऐतिहासिक पंचमुखी पंच कल्यानक कि भव्यता बताते हुए शुक्रवार को नसिया जी मे अपने प्रवचन के माध्यम से समाज को आशीर्वाद दिया। पूज्य मुनि श्री ने कहा कि हमें भगवान श्री राम कि सेना मे भर्ती होना है न कि रावण कि सेना मे। उन्होने एक बहुत ही प्रेरणादायक और गहरी बात कही कि रामायण हमें सिखाती है कि धर्म (श्री राम) और अधर्म (रावण) के बीच हमेशा एक विकल्प होता है। श्री राम की सेना धर्म, सत्य, त्याग और मर्यादा का प्रतीक है, जबकि रावण की सेना अहंकार, शक्ति के दुरुपयोग और अधर्म का। श्री राम की सेना का हिस्सा बनने और रावण के मार्ग से बचने का अर्थ है:सत्य का मार्ग चुनना: जीवन में हमेशा सच का साथ देना, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों।अहंकार का त्याग करना: रावण सबसे ज्ञानी था, लेकिन उसके अहंकार ने ही उसका विनाश किया। इसलिए विनम्र रहना। मर्यादा में रहना: अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन करना, जैसे श्री राम ने एक पुत्र, भाई और राजा के रूप में किया। दूसरों की भलाई करना: श्री राम ने वानर और भालू जैसी साधारण सेना को साथ लेकर लंका पर विजय प्राप्त की। इससे यह सीख मिलती है कि बल से ज्यादा महत्वपूर्ण नेक नीयत होती है। मुनि श्री नें कहा कि जैसा है वैसा जानो सबसे पहले सम्मयक दशर्न को जानो, विना समझें तुम जिंदिगी जियोगो, विना धर्म को समझें भक्ति करोगे तो उसका परिणाम नहीं आएगा. उन्होने कहा कि हमें पड़ना है जानना है जैन दर्शन मे महावीर स्वामी नें कहा है कि तुमने अपना सारा ज्ञान कर लिया है. अच्छा बुरा को समझो। मुनि श्री ने कहा कि हम सभी को पता है नशा नाश कि जड़ है लेकिन आजकल पुरुषों के साथ साथ कुछ कुछ नारीयाँ भी इस दल दल मे धसती जा रही है. हमें ज्ञान तो है कि गुटखा खाना स्वास्थ्य के लिए हानि कारक है फिर भी वह ज्ञानी गुटखा खा रहा है नशा कर रहा। हमें पता है रात्रि भोजन पाप है ये विज्ञान कि बात कर रहा हु. हम सब जानते हुए भी बुराई कि और जाते है फिर हम काएंगे ज्ञानी हो. हमें जहर का ज्ञान है और हमने उसे पी लिया तो नतीजा आपको पता है क्या होगा. रावण से बड़ा ज्ञानी कोई नहीं था लेकिन उसके पास चारित्र नही था. तो बही राम के पास चारित्र था. मुनि श्री ने जुआ को पाप बताया उन्होंने कहा कि एक दिन का जुआ कंगाल कर देता है. आपको पता है एक जुए के कारण पांडवो को इंद्र प्रस्थ गवाना पड़ा। धर्मराज ने बिना सोचे समझें इंद्र प्रस्थ को दाँव पर लगा दिया. भाइयों को दाँव पर लगा दिया पत्नी को दाँव पर लगा दिया पांचाली जो एक सती थी उसे ही दाँव पर लगा दिया. धर्म राज जो ज्ञानी थे फिर भी जुए के व्यसन मे अपने ज्ञान को भूलकर अपनी सारी संम्पत्ति सहित भाइयों को और पांचाली तक को भी जुए के दाँव पर लगा दिए। पूज्य मुनि श्री ने कहा की ज्ञान प्राप्त करना कोई बड़ी बात नही ज्ञान तो रावण के पास भी था लेकिन उसके पास चारित्र नही था क्योंकि चारित्र हर कोई प्राप्त नही कर सकता है. उन्होने कहा कि सुन लो गुना बालों आप तो मेरे दीवाने हो आप मेरे दीवाने आत्म कल्याण के लिए है. गुना वाले तो भगवान श्री राम कि सेना है. इसलिए गुना मे होने जा रहे पंचमुखी मे हर घर कि उपस्थिति हो. जिस प्रकार आपने मेरी अगवानी कि उससे सौ गुना भगवान के पंच कल्याणक मे हो। मिडिया प्रभारी विकास जैन नखराली ने बताया कि गुरुवार को गुना पुलिस अधीक्षक हितिका बांसल सहित पुलिस प्रशासन के अधिकारीयों ने नसियाजी पहुंच पूज्य महाराज श्री के दर्सन कर आशिर्वाद लिया. बजरंग कमेटी अध्यक्ष एस के जैन एवं मंत्री प्रदीप जैन ने बताया कि पूज्य मुनि श्री बजरंग गड़ रोड स्थित नसिया जी मे बिराजमान है. जिनके प्रतिदिन प्रवचन सुवह 7.40 पर आरंभ होते है. प्रवचन पश्चात नसिया जी के प्रांगण मे पड़गाहन होकर मुनी श्री कि आहार चर्या होती है. इसी के साथ ही सांयकाल 6 बजे प्रतिदिन जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम लाईव किया जाता है. जिसका सीधा प्रसारण अनेक देशों मे बैठे भक्तों द्वारा धर्म लाभ लिया जाता है। -सीताराम नाटानी ईएमएस