-पति-पत्नी के बीच मनमुटाव के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला नई दिल्ली,(ईएमएस)। पति-पत्नी के बीच मनमुटाव के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया कि पत्नी से 13 दिन तक बात न करना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने कहा कि शादीशुदा जिंदगी में मतभेद होना और कुछ दिनों तक एक-दूसरे से न बोलना एक सामान्य बात है। अक्सर लड़ाई-झगड़े के बाद पतियों के मुंह फुलाकर बैठने के मामले आम हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसे कानूनी तौर पर अपराध नहीं माना जा सकता और इसे अकेले में मानसिक क्रूरता नहीं कहा जा सकता। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंद की बेंच ने एक व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि पति को सिर्फ इसलिए क्रूरता का दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि कि उसने अपनी पत्नी से कुछ दिनों तक बात नहीं की थी। जानकारी के मुताबिक इस व्यक्ति को ट्रायल कोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट ने तीन साल कैद की सजा सुनाई थी। उसकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी और पति पर लगे आरोपों में एक आरोप यह भी था कि पत्नी की मौत से पहले पति ने उससे 13 दिनों तक बात नहीं की थी। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए व्यक्ति की सजा रद्द कर दी और कहा कि पति के व्यवहार को क्रूरता साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पति-पत्नी के बीच कोई बड़ी लड़ाई या विवाद भी नहीं हुआ था, जो प्रताड़ना या उकसावे की श्रेणी में आए और जिसकी वजह से पति को सजा दी जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में नसीहत भी दी कि अदालतों को यह देखना चाहिए कि पति का व्यवहार इतना गंभीर था या नहीं कि जिसकी वजह से महिला आत्महत्या करने को मजबूर हो जाए, उसे चोट पहुंचे या उसका मानसिक स्वास्थ्य खराब हो। सिराज/ईएमएस 05जून26