नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 11 महीनों में चीन को भारत का ऑयलमील निर्यात 20 गुना से अधिक बढ़कर 7.79 लाख टन पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा केवल 38,240 टन था। यह जानकारी सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने जारी की है। निर्यात में इस जबरदस्त वृद्धि का सबसे बड़ा कारण भारतीय रेपसीड मील की प्रतिस्पर्धी कीमतें और चीन में बढ़ी मांग बताई जा रही है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के दौरान चीन ने भारत से 7.71 लाख टन रेपसीड मील और 7,581 टन कैस्टरसीड मील का आयात किया। भारतीय उत्पाद यूरोपीय आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में सस्ते होने के कारण चीन के खरीदारों की पहली पसंद बने। विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ष 2025 में चीन द्वारा कनाडाई रेपसीड मील पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बाद भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिला। हालांकि अब चीन ने 1 मार्च 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक कनाडाई कैनोला मील पर लगाए गए शुल्क को निलंबित कर दिया है, जिससे भारतीय निर्यातकों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ने की आशंका है। वहीं दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और लाल सागर तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री व्यवधानों का असर भारतीय ऑयलमील निर्यात पर पड़ रहा है। शिपिंग मार्गों में बदलाव से परिवहन लागत और समय दोनों बढ़ गए हैं, जिससे निर्यातकों की चिंता बढ़ी हुई है। इसके बावजूद चीन को निर्यात में आई यह रिकॉर्ड बढ़ोतरी भारत के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जो वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है। सुबोध/०५-०६-२०२६