राष्ट्रीय
05-Jun-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। तमिलनाडु में एक दशक पुराने चुनावी विवाद पर फैसला सुनाते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव याचिकाओं के निपटारे में होने वाली देरी पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि चुनावी मामलों का समयबद्ध निपटारा लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है और इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले की गई टिप्पणियों का भी पालन होना चाहिए। यह टिप्पणी राधापुरम विधानसभा क्षेत्र से जुड़े 2016 के चुनावी मामले की सुनवाई के दौरान आई। अदालत ने फैसला सुनाते हुए डीएमके नेता एम. अप्पावु को वैध विजेता घोषित किया। यह चुनाव याचिका करीब 10 वर्षों तक लंबित रही, जिसके कारण अदालत ने न्यायिक प्रक्रिया में देरी पर सवाल उठाए। अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि यदि चुनावी विवादों के त्वरित निपटारे संबंधी कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया तो मतदाताओं के जनादेश का महत्व कम हो सकता है। अदालत ने टिप्पणी की कि न्याय में अत्यधिक देरी लोकतांत्रिक व्यवस्था और वयस्क मताधिकार की भावना को कमजोर कर सकती है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि इस मामले के निस्तारण में हुई देरी के लिए केवल निचली अदालतें ही नहीं, बल्कि उच्च स्तर पर लंबित न्यायिक प्रक्रियाएं भी जिम्मेदार रहीं। फैसले में कहा गया कि चुनावी याचिकाओं का शीघ्र निपटारा जनप्रतिनिधित्व कानून की मूल भावना है और इसका पालन सभी न्यायिक संस्थाओं को करना चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मद्रास हाईकोर्ट की यह टिप्पणी न्यायपालिका के भीतर चुनावी मामलों के त्वरित निपटारे पर नई बहस को जन्म दे सकती है। साथ ही यह फैसला इस बात को भी रेखांकित करता है कि लोकतंत्र में चुनावी विवादों का समय पर समाधान कितना महत्वपूर्ण है। सुबोध/०५-०६-२०२६