राज्य
05-Jun-2026


:: जिला उपभोक्ता आयोग ने माना सेवा में कमी; यात्री को वैकल्पिक व्यवस्था न देना पड़ा भारी :: इंदौर (ईएमएस)। सफर के दौरान तकनीकी खराबी आने पर यात्रियों को बीच रास्ते लावारिस छोड़ना और उनके लिए कोई वैकल्पिक इंतजाम न करना बस संचालक को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग क्रमांक-एक, इंदौर ने एक अहम फैसले में इंदौर सिटी ट्रेवल्स को सेवा में कमी का दोषी पाया है। आयोग ने ट्रेवल्स कंपनी को आदेश दिया है कि वह पीड़ित महिला यात्री को टिकट की राशि लौटाने के साथ ही मानसिक प्रताड़ना और अदालती खर्च के एवज में हर्जाना भी भुगते। :: शिरडी में खराब हुई थी बस, खुद के खर्च पर जाना पड़ा पुणे :: मामला जनवरी 2021 का है। परिवादी नूपुर चौधरी ने 20 जनवरी 2021 को इंदौर से पुणे जाने के लिए इंदौर सिटी ट्रेवल्स की बस में टिकट बुक कराया था। सफर के दौरान जब बस शिरडी पहुंची, तो वहां अचानक तकनीकी खराबी आ गई और बस आगे जाने की स्थिति में नहीं रही। ट्रेवल्स कंपनी ने यात्रियों को पुणे पहुंचाने के लिए कोई दूसरी व्यवस्था नहीं की। इसके चलते नूपुर को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा और अंततः अपनी जेब से अतिरिक्त पैसे खर्च कर दूसरी बस से पुणे की यात्रा पूरी करनी पड़ी। :: अदालत ने 45 दिन में भुगतान करने के दिए निर्देश :: इस लापरवाही को सेवा में गंभीर कमी बताते हुए नूपुर चौधरी ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया, जहां उनकी ओर से एडवोकेट सुरेश कांगा ने पैरवी की। आयोग ने मामले के सभी दस्तावेजों और सबूतों को देखने के बाद माना कि ट्रेवल्स प्रबंधन ने यात्रियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में अनावेदक इंदौर सिटी ट्रेवल्स को निर्देशित किया है कि वह नूपुर चौधरी को बस टिकट के 260 रूपये रिफंड करे। इसके अलावा, मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 5,000 रूपये और वाद व्यय (कानूनी खर्च) के रूप में 2,000 रूपये का भुगतान किया जाए। यह पूरी राशि आदेश मिलने के 45 दिनों के भीतर चुकानी होगी। यदि तय समय-सीमा में भुगतान नहीं किया गया, तो देय राशि पर सालाना ब्याज भी देना होगा। प्रकाश/05 जून 2026