राष्ट्रीय
06-Jun-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। दुनिया के कई देशों में मेडिकल शिक्षा और चिकित्सकीय लाइसेंस प्राप्त करने के लिए बेहद कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। चिकित्सा पेशे की संवेदनशीलता को देखते हुए विभिन्न देशों ने ऐसे मानक तय किए हैं, जिनमें केवल सबसे योग्य और सक्षम उम्मीदवार ही सफलता हासिल कर पाते हैं। अमेरिका की यूनाइटेड स्टेट्स मेडिकल लाइसेंसिंग एग्जामिनेशन यानी यूएसएमएलई को दुनिया की सबसे कठिन मेडिकल परीक्षाओं में गिना जाता है। अमेरिका में डॉक्टर के रूप में कार्य करने के लिए इस परीक्षा को पास करना अनिवार्य है। यह परीक्षा तीन चरणों में आयोजित होती है और इसमें उम्मीदवारों की सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ क्लिनिकल कौशल, मरीजों के उपचार की क्षमता और दबाव में निर्णय लेने की योग्यता का भी परीक्षण किया जाता है। कई छात्रों को इसे पूरा करने में वर्षों का समय लग जाता है। मेडिकल कॉलेज एडमिशन टेस्ट यानी एमकैट भी अमेरिका और कनाडा के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का प्रमुख माध्यम है। यह कंप्यूटर आधारित परीक्षा सात घंटे से अधिक समय तक चलती है। इसमें जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिकी, मनोविज्ञान और तार्किक विश्लेषण से जुड़े जटिल प्रश्न पूछे जाते हैं, जो छात्रों की गहन समझ और विश्लेषण क्षमता की परीक्षा लेते हैं। भारत की नीट यूजी परीक्षा भी कठिनता और प्रतिस्पर्धा दोनों के कारण वैश्विक स्तर पर चर्चा में रहती है। हर साल 20 से 25 लाख से अधिक विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं, जबकि सरकारी मेडिकल सीटों की संख्या सीमित होती है। कई बार एक या दो अंकों का अंतर भी अभ्यर्थियों के डॉक्टर बनने के सपने को प्रभावित कर देता है, जिससे यह परीक्षा मानसिक दबाव के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। ब्रिटेन में चिकित्सा सेवा देने के इच्छुक विदेशी डॉक्टरों को प्रोफेशनल एंड लिंग्विस्टिक असेसमेंट बोर्ड यानी प्लैब परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। इसका दूसरा चरण विशेष रूप से कठिन माना जाता है, जिसमें उम्मीदवारों को वास्तविक परिस्थितियों जैसी क्लिनिकल स्थितियों में परखा जाता है। यहां छोटी सी गलती भी असफलता का कारण बन सकती है। वहीं चीन में मेडिकल शिक्षा के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षाएं भी अपनी कठिन चयन प्रक्रिया के लिए प्रसिद्ध हैं। देश की विशाल आबादी और प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में सीमित अवसरों के कारण छात्रों को विज्ञान और विश्लेषणात्मक क्षमता से जुड़े बेहद कठिन प्रश्नों का सामना करना पड़ता है। कम सफलता दर और उच्च प्रतिस्पर्धा के कारण ये परीक्षाएं भी दुनिया की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल मानी जाती हैं। इन सभी परीक्षाओं की कठिनाई भले अलग-अलग हो, लेकिन एक बात समान है कि डॉक्टर बनने के लिए केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि असाधारण धैर्य, समर्पण और निरंतर तैयारी की भी आवश्यकता होती है। मालूम हो कि भारत में हर वर्ष आयोजित होने वाली नीट परीक्षा लाखों छात्रों के भविष्य का फैसला करती है। परीक्षा केंद्रों के बाहर उमड़ने वाली अभ्यर्थियों की भीड़ और सीमित सीटों के लिए होने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा यह बताने के लिए काफी है कि डॉक्टर बनने का सफर कितना चुनौतीपूर्ण है। सुदामा/ईएमएस 06 जून 2026