मुंबई (ईएमएस)। बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने के निर्णय को संतुलित और विवेकपूर्ण कदम बताया है। बैंकरों का कहना है कि यह निर्णय पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊंची ऊर्जा कीमतों के बीच आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की सोच को दर्शाता है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन एवं भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के अध्यक्ष सीएस शेट्टी ने कहा कि विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए एफसीएनआर (बी) जमा, सरकारी प्रतिभूतियों, विदेशों से उधारी और इक्विटी निवेश से जुड़े जो उपाय घोषित किए गए हैं, वे समयोचित और व्यापक हैं। इन कदमों से पूंजी प्रवाह में वृद्धि होगी, बॉन्ड बाजारों का विस्तार होगा, नकदी में सुधार आएगा और रुपये को मजबूती मिलेगी। बैंकिंग विशेषज्ञों ने कहा कि इन कदमों से बाजार में नकदी में सुधार होगा और रुपये को मजबूती मिलेगी। इंडियन ओवरसीज बैंक के एक अधिकारी ने कहा कि हालांकि अर्थव्यवस्था जुझारूपन दिखा रही है और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.6 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। फिर भी पश्चिम एशिया में तनाव और ऊंची ऊर्जा कीमतों को देखते हुए सतर्क रुख अपनाना उचित है। सतीश मोरे/06जून ---