- एआई के बढ़ते इस्तेमाल से पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग पर बढ़ सकता है दबाव नई दिल्ली (ईएमएस)। अमेरिका की बड़ी रिटेल कंपनियों का कारोबार सुधर रहा है और तकनीक पर खर्च भी बढ़ रहा है। इससे भारतीय आईटी कंपनियों को नए प्रोजेक्ट मिलने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं है, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल से पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग पर दबाव भी बढ़ सकता है। अमेरिका में उपभोक्ताओं का खर्च मजबूत बना हुआ है। लोग अभी भी खरीदारी कर रहे हैं, खासकर ऑनलाइन और कम कीमत वाले उत्पादों पर। इसी वजह से कई बड़ी रिटेल कंपनियों की बिक्री और मुनाफे में सुधार देखने को मिला है। अधिकांश कंपनियों ने पूरे साल के लिए अपने अनुमान बरकरार रखे हैं या उन्हें बढ़ाया है। कॉस्टको, वॉलमार्ट और टारगेट जैसी कंपनियों ने तिमाही के दौरान मजबूत प्रदर्शन किया। ऑनलाइन बिक्री में तेजी और उपभोक्ताओं की लगातार खरीदारी ने इनके कारोबार को सहारा दिया। वहीं मैसीज़ और बेस्ट बाय जैसी कंपनियों में भी सुधार के संकेत मिले हैं। हालांकि कंपनियां अभी भी पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं। उन्हें चिंता है कि टैक्स रिफंड का फायदा धीरे-धीरे खत्म होगा, जबकि ऊंची ऊर्जा कीमतें और वैश्विक तनाव आगे कारोबार को प्रभावित कर सकते हैं। रिटेल कंपनियों की रणनीति में एक बड़ा बदलाव यह देखने को मिला है कि अब एआई सिर्फ प्रयोग या पायलट प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है। कंपनियां इसे सीधे अपने कारोबार में लागू कर रही हैं ताकि लागत कम हो, कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़े और मुनाफा सुधरे। यानी एआई अब खर्च बढ़ाने वाली तकनीक नहीं, बल्कि कमाई बढ़ाने और मार्जिन सुधारने का जरिया बनता जा रहा है। यही बदलाव भारतीय आईटी कंपनियों के लिए चुनौती भी बन सकता है। अब कई ऐसे काम, जो पहले बड़ी आईटी टीमों के जरिए किए जाते थे, एआई की मदद से तेजी और कम लागत में पूरे हो रहे हैं। इसका असर खासकर एप्लिकेशन सपोर्ट, टेस्टिंग, क्वालिटी एश्योरेंस, रिपोर्टिंग और मेंटेनेंस जैसी सेवाओं पर पड़ सकता है। ये ऐसे क्षेत्र हैं जिनसे भारतीय आईटी कंपनियों को लंबे समय से बड़ा कारोबार मिलता रहा है। भारतीय आईटी कंपनियों के रिटेल और कंज्यूमर कारोबार में पिछले कुछ महीनों के दौरान सुधार देखने को मिला है। सतीश मोरे/06जून ---