राज्य
06-Jun-2026
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भोपाल(ईएमएस)। नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय से संबद्ध पशुपालन डिप्लोमा कॉलेज, भोपाल के प्रभारी प्राचार्य एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गौरव साहू को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। उपलब्ध दस्तावेजों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों के आधार पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या वे भोपाल में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए राजस्थान स्थित एक अन्य संस्थान से भी जुड़े रहे हैं। मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी द्वारा एक संस्थान में पदस्थ रहते हुए दूसरे संस्थान में भी नियमित रूप से सेवाएं दी गई हैं, तो यह सेवा नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में जांच का विषय हो सकता है। जानकारी के अनुसार, डॉ. साहू वर्तमान में भोपाल स्थित पशुपालन डिप्लोमा कॉलेज में प्रभारी प्राचार्य के रूप में कार्यरत हैं। इसी बीच राजस्थान के एक अन्य संस्थान से उनके संबंधों और वहां संभावित रूप से दी जा रही सेवाओं को लेकर प्रश्न खड़े किए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। शिकायत में यह भी पूछा गया है कि यदि डॉ. साहू किसी अन्य संस्थान से जुड़े थे या हैं, तो क्या इसकी जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को थी? क्या इसके लिए सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई थी? क्या दोनों संस्थानों में उपस्थिति और सेवा अभिलेखों का रिकॉर्ड उपलब्ध है? इन सभी पहलुओं की जांच किए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। मामले से जुड़े पक्षों का कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे पदों पर कार्यरत अधिकारियों की भूमिका सीधे तौर पर छात्रों, शैक्षणिक व्यवस्था और संस्थान की साख से जुड़ी होती है। इसलिए किसी भी प्रकार की शंका या शिकायत की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। फिलहाल इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन आरोपों की जांच किस प्रकार करता है और उपलब्ध दस्तावेजों तथा अभिलेखों के आधार पर क्या निष्कर्ष सामने आते हैं। ईएमएस/06/06/26