रुस पर कम होगी देश की निर्भरता नई दिल्ली,(ईएमएस)। वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत अपनी तेल आपूर्ति को सुरक्षित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा दिया है। इसी कड़ी में तेल संपदा से समृद्ध वेनेजुएला भारत के लिए महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में वेनेजुएला भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति में अहम भूमिका निभा सकता है, हालांकि वह पूरी तरह रूस का विकल्प नहीं बनेगा। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदकर भारत ने अपनी आयात रणनीति को नया स्वरूप दिया था। रूस जल्द ही भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया और वैश्विक कीमतों के दबाव को कम करने में मददगार साबित हुआ। हालांकि, हाल के वर्षों में होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भारत को यह सोचने पर मजबूर किया है कि ऊर्जा आपूर्ति के लिए किसी एक क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है। इसी कारण नई दिल्ली अब वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में जुटी है और वेनेजुएला इस दिशा में एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आया है। बात दें कि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है, जिसका अनुमान करीब 303 अरब बैरल लगाया जाता है। यह भंडार सऊदी अरब सहित कई प्रमुख तेल उत्पादक देशों से भी अधिक है। देश के ओरिनोको क्षेत्र में विशाल मात्रा में भारी कच्चा तेल मौजूद है, जिसे संसाधित करने की क्षमता भारत की कई रिफाइनरियों के पास मौजूद है। हाल के महीनों में भारत ने वेनेजुएला से तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की है। रिपोर्टों के अनुसार, मई में भारत वेनेजुएला के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से मजबूत हो रहा है। भारत और वेनेजुएला के बीच उच्चस्तरीय वार्ताओं में दीर्घकालिक ऊर्जा समझौतों पर भी चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का उद्देश्य रूस को छोड़कर किसी दूसरे देश पर निर्भर होना नहीं, बल्कि आपूर्ति स्रोतों का विस्तार करना है। रूस अभी भी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण और आर्थिक रूप से लाभकारी साझेदार बना हुआ है। लेकिन वेनेजुएला जैसे नए विकल्प भारत को अधिक लचीलापन, बेहतर सौदेबाजी क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य की वैश्विक परिस्थितियों को देखकर भारत की यह रणनीति दूरदर्शी साबित हो सकती है। यदि दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ता है, तब वेनेजुएला भारत के ऊर्जा मानचित्र में एक प्रमुख स्थान हासिल कर सकता है और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। आशीष दुबे / 06 जून 2026