-इजरायली विशेषज्ञ ने भारत को किया सतर्क -पाकिस्तान को अमेरिकी सहायता पैकेज पर उठे सवाल नई दिल्ली,(ईएमएस)। पाकिस्तान को अमेरिकी एफ-16 लड़ाकू विमानों के लिए मिले तकनीकी सहायता पैकेज को लेकर नई बहस छिड़ गई है। इजरायली रक्षा विशेषज्ञ शय गल ने दावा किया है कि पाकिस्तान के पास मौजूद अमेरिकी सैन्य तकनीक का अप्रत्यक्ष लाभ चीन को मिल सकता है, जिससे भारत की सुरक्षा चुनौतियां बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञ के अनुसार अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के एफ-16 बेड़े के लिए स्वीकृत सहायता पैकेज केवल रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स तक सीमित नहीं है। इसमें उन्नत संचार प्रणाली, मिशन सॉफ्टवेयर, सुरक्षित डेटा नेटवर्क, प्रशिक्षण, सिमुलेटर और अन्य आधुनिक तकनीकी सुविधाएं भी शामिल हैं। उनका कहना है कि इनमें सबसे महत्वपूर्ण तकनीक लिंक-16 है, जिसे आधुनिक युद्ध प्रणाली की नर्वस सिस्टम के रूप में देखा जाता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक लिंक-16 एक सुरक्षित और उन्नत डेटा नेटवर्क है, जो लड़ाकू विमानों, मिसाइल प्रणालियों, युद्धपोतों और कमांड सेंटरों के बीच वास्तविक समय में सूचनाओं का आदान-प्रदान सुनिश्चित करता है। इससे युद्धक्षेत्र में बेहतर समन्वय और त्वरित निर्णय लेने में मदद मिलती है। शय गल का तर्क है कि चीन और पाकिस्तान के बीच गहरे सैन्य संबंधों को देखते हुए बीजिंग को इस तकनीकी ढांचे के संचालन, क्षमताओं और सीमाओं को समझने का अवसर मिल सकता है। उनका कहना है कि चीन लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रों में विदेशी तकनीकों के अध्ययन और विश्लेषण के जरिए अपनी सैन्य क्षमताओं को विकसित करता रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही अमेरिका, पाकिस्तान या चीन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। फिर भी रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि दक्षिण एशिया में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच ऐसी तकनीकों का हस्तांतरण और उनका संभावित प्रभाव सुरक्षा विश्लेषकों के लिए महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत लगातार अपनी स्वदेशी रक्षा क्षमताओं, नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली और आधुनिक वायु रक्षा तंत्र को मजबूत कर रहा है। ऐसे में क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में तकनीकी बढ़त बनाए रखना आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। हिदायत/ईएमएस 06जून26