सोने की चाह में मौत से आंख-मिचौली खेलते लोग जिनेवा (ईएमएस)। यह जगह वैसे तो धरती पर ही मौजूद है, लेकिन इसका वास्ता जमीन से ज्यादा आसमान से है। यहां रहने वालों के लिए हाड़ कंपाने वाली ठंड से भी बड़ी चुनौती हवा है, जहां इंसान को सांस का हर कतरा अंदर खींचने के लिए अपने फेफड़ों को दोगुनी मेहनत करानी पड़ती है। समुद्र तल से 5,100 मीटर की ऊंचाई पर पेरू के एंडीज पर्वतों में बसी इस बस्ती का नाम है ला रिनकोनाडा। यह शहर ला बेला डुरमिएंट (स्लीपिंग ब्यूटी) नामक एक विशाल ग्लेशियर के ठीक नीचे स्थित है, जहां कुदरत के नियम पूरी तरह बदल जाते हैं। इतनी ऊंचाई पर न तो कोई पेड़ उगता है और न ही हरियाली दिखती है; चारों तरफ सिर्फ काले पहाड़ और सफेद बर्फ का साम्राज्य है।विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) जैसी वैश्विक संस्थाओं की रिपोर्ट के अनुसार, इतनी ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन की मात्रा मैदानी इलाकों के मुकाबले महज 50 प्रतिशत रह जाती है। इस वजह से यहां की आबादी का एक बड़ा हिस्सा क्रोनिक माउंटेन सिकनेस से पीड़ित है। ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण लोगों का खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे लगातार सिरदर्द, थकान और दिल के दौरे का खतरा बना रहता है। इस जानलेवा माहौल के बावजूद यहां लगभग 30 हजार लोग रहते हैं, जिन्हें यहां छिपा सोने का जादुई लालच खींचकर लाता है। गरीबी से जूझ रहे हजारों लोग अपनी किस्मत आजमाने इन दुर्गम पहाड़ों पर पहुंचते हैं, जिससे टीन की छतों और तिरपाल से बनी यह बस्ती एक शहर में तब्दील हो गई है। यहां खदानों में काम करने वाले मजदूरों को कोई तय पगार नहीं मिलती, बल्कि यहां कैचोरियो नामक एक अनोखा पुराना सिस्टम लागू है। इसके तहत खनिक 30 दिनों तक बिना किसी वेतन के खदान में पसीना बहाते हैं और 31वें दिन उन्हें अपनी पीठ पर लादकर उतना अयस्क (पत्थर और मिट्टी) ले जाने की छूट होती है, जितना वे एक बार में उठा सकें। अगर किस्मत अच्छी रही तो उस पत्थर से सोना निकलता है और वे मालामाल हो जाते हैं, अन्यथा उनकी महीने भर की हाड़-तोड़ मेहनत शून्य हो जाती है। सुविधाओं के नाम पर इस सबसे ऊंची मानव बस्ती में न तो पक्की सड़कें हैं, न पीने के साफ पानी की पाइपलाइन और न ही सीवेज सिस्टम। लोग ग्लेशियर की बर्फ पिघलाकर पानी पीते हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि सोने को अलग करने के लिए पारे का अंधाधुंध इस्तेमाल होता है, जिससे यहां की जमीन, पानी और हवा में जहर घुल चुका है। इसके अलावा, खदानों में एक अंधविश्वास के कारण महिलाओं का अंदर जाना वर्जित है। वे बाहर जमा देने वाली ठंड में खदान से निकले मलबे को हथौड़े से तोड़कर सोने के बारीक कण तलाशती हैं। इन भयानक परिस्थितियों के बाद भी यहां के लोगों में गजब का भाईचारा है। वे पचमामा यानी धरती माता पर विश्वास रखते हैं, कम ऑक्सीजन में भी फुटबॉल खेलते हैं और इस उम्मीद में जीते हैं कि एक दिन सोना उन्हें इस नर्क से मुक्ति दिलाएगा। भयानक ऊंचाई पर बसे सबसे ऊंची मानव बस्ती ला रिनकोनाडा में पक्की सड़कें नहीं हैं। बर्फ और बारिश से सड़कें कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं जो रात में जम कर पत्थर बन जाती हैं। यहां न तो पीने के साफ पानी की पाइपलाइन है, न ही कोई सीवेज सिस्टम। लोग ग्लेशियर की बर्फ पिघलाकर पानी पीते हैं और कचरा घरों के पास ही पहाड़ बनते रहता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि सोने को अलग करने के लिए यहां पारा का अंधाधुंध इस्तेमाल होता है। इस कारण यहां की जमीन, पानी और हवा में जहर घुल चुका है। कड़ाके की ठंड, कुपोषण, पारे के धुएं और ऑक्सीजन की कमी के कारण लोगों को फेफड़ों की गंभीर बीमारियां होती हैं। यहां का जीवन सचमुच हर दिन मौत से आंख मिचौली खेलने जैसा है। वीरेंद्र/ईएमएस 08 जून 2026