ज्यूरिख (ईएमएस)। स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण तकनीक के क्षेत्र में स्विट्जरलैंड ऐतिहासिक परियोजना को आकार दे रहा है। जर्मनी की सीमा के निकट स्थित लाउफेनबर्ग में दुनिया की सबसे बड़ी भूमिगत रेडॉक्स फ्लो बैटरी तैयार की जा रही है, जिसे भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक महत्वपूर्ण समाधान माना जा रहा है। इस परियोजना को फ्लेक्सबेस और इन्विनिटी एनर्जी सिस्टम्स के सहयोग से तैयार किया जा रहा है और इसके पूरा होने के बाद यह वैश्विक ऊर्जा अवसंरचना के लिए एक नया मानक स्थापित कर सकती है। प्रस्तावित बैटरी की क्षमता 2.1 गीगावाट-घंटे होगी, जबकि यह अधिकतम 1.2 गीगावाट बिजली आपूर्ति करने में सक्षम होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी सहायता से करीब 2.1 लाख घरों को पूरे एक दिन तक बिजली उपलब्ध हो सकती है। यह परियोजना विशेष रूप से सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को संग्रहित करने और आवश्यकता पड़ने पर उसे ग्रिड में वापस उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित की जा रही है। परियोजना के लिए आर्गौ कैंटन के लाउफेनबर्ग क्षेत्र में करीब दो फुटबॉल मैदानों के बराबर क्षेत्रफल और लगभग 27 मीटर गहराई वाला विशाल भूमिगत ढांचा तैयार किया जा रहा है। यह स्थान यूरोपीय बिजली नेटवर्क के एक प्रमुख केंद्र के रूप में भी जाना जाता है, जिससे इसकी रणनीतिक उपयोगिता और बढ़ जाती है। इस बैटरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी रेडॉक्स फ्लो तकनीक है। पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरियों की तुलना में यह तकनीक अधिक सुरक्षित मानी जाती है क्योंकि इसमें तरल इलेक्ट्रोलाइट का उपयोग होता है, जिससे आग लगने का खतरा बेहद कम रहता है। साथ ही इसकी कार्यक्षमता लंबे समय तक बनी रहती है और यह दशकों तक प्रभावी ढंग से ऊर्जा भंडारण कर सकती है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में आने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित करने के लिए बड़े स्तर की ऊर्जा भंडारण प्रणालियां भविष्य की आवश्यकता बन चुकी हैं। वर्ष 2028-29 तक पूरी होने वाली यह परियोजना न केवल ऊर्जा व्यापार को मजबूती देगी, बल्कि तेजी से बढ़ रहे एआई आधारित डेटा सेंटरों को भी निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे स्वच्छ, सुरक्षित और भरोसेमंद ऊर्जा व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। आशीष/ईएमएस 08 जून 2026