ज़रा हटके
08-Jun-2026
...


एम्स्टर्डम (ईएमएस)। बेल्जियम और नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने मिलकर जीस्मो नामक एक अत्याधुनिक तकनीक विकसित की है। इस तकनीक से पेट की हर जांच अब दर्द रहित होगी। इतना ही नहीं, इस तकनीक से कैंसर का भी समय से पूर्व पता लगाया जा सकेगा। बस, आपको सिर्फ एक छोटी सी कैप्सूल निगलनी होगी, जो आपके पूरे पाचन तंत्र की निगरानी करेगी। माउथ फ्रेशनर जितनी छोटी एक कैप्सूल में एक माइक्रोचिप, केमिकल सेंसर और एक वायरलेस ट्रांसमीटर लगे हैं। यह कैप्सूल आपकी पूरी पाचन प्रणाली की जांच न केवल दर्द रहित तरीके से कर सकेगी, बल्कि पेट के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की भी समय रहते पहचान संभव बना सकेगी। यह स्मार्ट कैप्सूल एक बार निगलने के बाद मरीज के पेट और आंतों के भीतर यात्रा करती है। इस यात्रा के दौरान, यह पाचन तंत्र में होने वाले रासायनिक बदलावों की बारीकी से और लगातार निगरानी करती है। इसके विशेष सेंसर हर बीस सेकंड में एक नई और सटीक रीडिंग लेते हैं, और इस जानकारी को मरीज के शरीर के बाहर लगे एक विशेष रिसीवर को वायरलेस तरीके से भेजते हैं। इस रियल-टाइम डेटा की मदद से डॉक्टर पेट और आंतों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं, जैसे एसिडिटी का स्तर, संक्रमण, अल्सर, सूजन, और यहाँ तक कि कैंसर के शुरुआती सूक्ष्म संकेतों को भी समय रहते पकड़ सकते हैं। इस क्रांतिकारी पहचान प्रणाली से मरीजों का उपचार तुरंत शुरू किया जा सकेगा, जिससे बीमारियों के गंभीर होने से पहले ही उन्हें नियंत्रित किया जा सके। पारंपरिक जांचें जैसे एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी अकसर मरीजों के लिए न केवल असुविधाजनक और दर्दनाक होती हैं, बल्कि वे महंगी भी होती हैं और इनमें रिकवरी का समय भी लगता है। लगभग दो दशक पहले विकसित की गई पिलकैम तकनीक एक कैप्सूल थी जो पेट की तस्वीरें तो भेज सकती थी, लेकिन यह पेट के अंदर होने वाली रासायनिक गतिविधियों या विभिन्न गैसों का विश्लेषण नहीं कर पाती थी। जीस्मो कैप्सूल इस कमी को पूरा करता है। यह केवल तस्वीरें ही नहीं, बल्कि जैव-रासायनिक बदलावों की भी लाइव जानकारी प्रदान करता है, जिससे यह पहले से कहीं अधिक प्रभावी और व्यापक जांच उपकरण बन जाता है। यह मरीज को बिना किसी दर्द या असहजता के आंतरिक अंगों की गहरी जानकारी उपलब्ध कराता है। इस अत्याधुनिक तकनीक को व्यावहारिक बनाने में एक और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि ने मदद की है। इटली के वैज्ञानिकों ने दुनिया की पहली रिचार्जेबल और खाने योग्य बैटरी विकसित की है। इस क्रांतिकारी बैटरी को विटामिन बी2, केपर्स फल से मिलने वाले क्वेरसेटिन, एक्टिवेटेड चारकोल, समुद्री घास और मधुमक्खी के मोम जैसी पूरी तरह से प्राकृतिक और खाद्य सामग्रियों से बनाया गया है। इसके साथ ही, वैज्ञानिकों ने टूथपेस्ट में इस्तेमाल होने वाले नीले पिगमेंट की मदद से एक खाने योग्य ट्रांजिस्टर भी तैयार किया है, जो इस स्मार्ट कैप्सूल के संचालन के लिए आवश्यक है। इन अभिनव घटकों के बिना जीस्मो कैप्सूल का निर्माण संभव नहीं था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में पेट और आंतों से जुड़ी बीमारियों की पहचान के तरीके को पूरी तरह से बदल सकती है। सुदामा/ईएमएस 08 जून 2026