वाशिंगटन (ईएमएस)। साल 2014 में अफ्रीका के ट्यूनीशिया में स्थित गैफ्सा झील अचानक ही रेगिस्तान के शुष्क और बंजर इलाके के बीच प्रकट हो गई थी, जहां पहले केवल सूखी जमीन, चट्टानें और रेत के टीले ही दिखाई देते थे। देखते ही देखते यह जगह चर्चा का विषय बन गई और इसे “रेगिस्तान की रहस्यमयी झील” के नाम से पुकारा जाने लगा। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस झील के बनने का कोई स्पष्ट और सर्वमान्य कारण शुरुआत में सामने नहीं आया था। वैज्ञानिकों ने कई सिद्धांतों पर विचार किया, जिनमें से एक प्रमुख मत यह था कि किसी भूगर्भीय गतिविधि या जमीन के नीचे मौजूद चट्टानों में अचानक दरार पड़ने के कारण, भूमिगत जल का एक विशाल भंडार सतह पर आ गया होगा, जिससे इस झील का निर्माण हुआ। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना था कि लंबे समय से जमीन के नीचे जमा पानी को अचानक बाहर आने का कोई नया रास्ता मिल गया, जिसके परिणामस्वरूप यह झील दिखाई देने लगी। रेगिस्तान जैसे शुष्क और गर्म इलाके में इतनी बड़ी मात्रा में ताजे पानी का अचानक मिलना अपने आप में एक असाधारण और लगभग अविश्वसनीय घटना थी, जिसने दुनिया भर का ध्यान खींचा। समय के साथ, यह रहस्यमयी झील स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन गई। आसपास के निवासी और दूर-दूर से आने वाले पर्यटक यहां तैरने और इस अनूठे प्राकृतिक दृश्य का अनुभव करने आने लगे। हालांकि, वैज्ञानिकों ने इसकी सुरक्षा और पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंताएं भी व्यक्त कीं। उनका कहना था कि झील का पानी स्थानीय भूभाग में मौजूद खनिजों और अन्य तत्वों से प्रभावित हो सकता है, जिससे इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं और संभावित स्वास्थ्य जोखिम भी हो सकते हैं। इस सबके बावजूद, इस रहस्यमयी जलाशय ने दुनिया भर में कौतूहल पैदा किया। गैफ्सा झील का रहस्य केवल इसके अचानक प्रकट होने तक ही सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भूमिगत जल का स्रोत, जिससे इसे पानी मिल रहा है, कमजोर पड़ जाए या भूगर्भीय परिस्थितियां बदल जाएं, तो यह झील धीरे-धीरे सिकुड़ सकती है या पूरी तरह से गायब भी हो सकती है। यही कारण है कि इसे एक अस्थायी प्राकृतिक घटना माना जाता है। दुनिया में कई ऐसी झीलें हैं जो मौसम और जलस्तर के अनुसार बनती और खत्म होती रहती हैं, लेकिन रेगिस्तान के बीच बिना किसी पूर्व संकेत के अचानक प्रकट होने वाली गैफ्सा झील का मामला काफी अलग, अनोखा और रोचक है। यह एक ऐसा उदाहरण है जो हमें याद दिलाता है कि हमारी पृथ्वी अभी भी कितने गहरे रहस्य समेटे हुए है। सुदामा/ईएमएस 08 जून 2026