ज़रा हटके
08-Jun-2026
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- प्रकृति को दोहन की वस्तु मानने की बजाय उसे कानूनी अधिकार दिए नई दिल्ली,(ईएमएस)। पूरी दुनिया ही विश्व पर्यावरण दिवस मनाती है, इस दिन धरती को बचाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिनके जरिए लोगों को जागरुक किया जाता है। भारत में भी धरती को बचाने के लिए लाखों पेड़ लगाए जाते हैं। हमारे यहां पीएम मोदी के नेतृत्व में एक पेड़ मां के नाम अभियान शुरु किया गया है जिसके तहत आम नागरिक के साथ नेता भी इस अभियान में भाग लेते हैं लेकिन कुछ देश ऐसे भी हैं जो इस धरती को मां के साथ-साथ कानूनी अधिकार भी देते हैं हम उन्हीं कुछ देशों के बारे में आपको जानकारी दे रहे हैं। दुनिया के कुछ दूरदर्शी देशों ने प्रकृति को दोहन की वस्तु मानने की बजाय उसे कानूनी अधिकार दिया है। इन देशों में नदियों, जंगलों और पारिस्थितिकी तंत्र को जीवित माना है, जिनके अपने कानूनी अधिकार हैं।。प्रकृति को सहेजने वाले देशों में इक्वाडोर, फिलीपींस, कोस्टा रिका, फ्रांस और बोलीबिया हैं। इक्वाडोर यह दुनिया का पहला ऐसा देश है, जिसने 2008 में अपने संविधान में प्रकृति के अधिकारों को शामिल किया था। इसे वहां की भाषा में पचमामा यानी धरती माता कहते हैं,。 इसके तहत कोई भी नागरिक या समुदाय प्रकृति के नुकसान के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दर्ज करा सकता है। 2010 और 2012 में बोलिविया इस दक्षिण अमेरिकी देश ने ऐतिहासिक धरती माता के कानून पारित किए, इसमें प्रकृति को मनुष्य के समान ही अधिकार दिए गए। जैसे- जीवन, शुद्ध जल और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन का अधिकार दिया गया। न्यूजीलैंड ने माओरी आदिवासी समुदाय की मान्यताओं का सम्मान करते हुए 2012 में ते उरेवेरा के जंगल को 2014 में वांगानुई नदी को कानूनी व्यक्ति माना यानी इन प्राकृतिक स्थलों के पास ठीक एक इंसान की तरह कानूनी अधिकार हैं। सिराज/ईएमएस 08 जून 2026