वॉशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे चरण की महत्वपूर्ण शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध की आग भड़क उठी है। संघर्ष विराम की कोशिशों को तब बड़ा झटका लगा जब इजरायल ने ईरान पर नए सिरे से हमले शुरू कर दिए। इजरायली प्रशासन का दावा है कि युद्धविराम लागू होने के बाद पहले ईरान की ओर से उकसावे वाली कार्रवाई की गई थी, जिसके जवाब में यह सैन्य कदम उठाया गया है। जानकारी के अनुसार, ईरान समर्थित हिजबुल्ला ने उत्तरी इजरायल में गोलीबारी की थी, जिसके बाद इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों को निशाना बनाया। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इजरायल द्वारा किए गए इन हमलों का शांति वार्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ट्रंप ने इजरायल के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए उसे लेबनान पर हमले तुरंत बंद करने की नसीहत दी है। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच तीखी बहस भी हुई है। इस भयंकर कूटनीतिक और सैन्य गतिरोध के बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री एक अत्यंत महत्वपूर्ण और खास संदेश लेकर तेहरान पहुंचे हैं, जहां वह सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई से मुलाकात कर क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा करेंगे। दूसरी तरफ, जमीनी हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए खतरा बने दो ईरानी ड्रोनों को अमेरिकी सेना ने मार गिराने का दावा किया है। अप्रैल में युद्धविराम पर सहमति बनने के बावजूद दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कुछ महीनों के संघर्ष में हजारों मासूमों की जान जा चुकी है और दुनिया के सामने एक गंभीर ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। हाल ही में अमेरिकी सेना ने गोरुक और क़ेश्म द्वीप पर स्थित ईरानी रडार केंद्रों तथा ड्रोन कमान सुविधाओं को तहस-नहस कर दिया, जिसके जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन की तरफ भीषण मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कुवैत और बहरीन के रक्षा मंत्रालयों के अनुसार, उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए ईरान की कई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया, जिससे एक बड़ी तबाही टल गई। हालांकि, इससे पहले हुए एक ईरानी ड्रोन हमले में कुवैत के मुख्य हवाई अड्डे के पैसेंजर टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचा था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और सऊदी अरब सहित कई प्रमुख खाड़ी देशों ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। ईरान के सरकारी प्रसारक ने दावा किया है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अमेरिकी ठिकानों पर यह जवाबी कार्रवाई की है और इसे अमेरिका द्वारा किए गए युद्धविराम उल्लंघन का एक सतर्क और अनुपातिक जवाब बताया है। फिलहाल, शांति वार्ता कई जटिल और अनसुलझे मुद्दों पर अटकी हुई है। ईरान अपनी जमी हुई अरबों डॉलर की वैश्विक संपत्तियों को तत्काल मुक्त करने और प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है। इसके विपरीत, वाशिंगटन का रुख स्पष्ट है कि कोई भी वित्तीय राहत देने से पहले ईरान को उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के अपने भंडार को पूरी तरह नष्ट करना होगा। इसके अलावा, ईरानी कच्चे तेल के निर्यात पर से प्रतिबंध हटाना, होर्मुज जलडमरूमध्य की समुद्री सुरक्षा और लेबनान में अलग से युद्धविराम लागू करने जैसी शर्तें इस पूरे विवाद को और अधिक पेचीदा बना रही हैं, जिससे क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीदें फिलहाल धुंधली नजर आ रही हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/08जून2026