जनसंख्या असंतुलन का बढ़ा खतरा वॉशिंगटन,(ईएमएस)। स्पेसएक्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एलन मस्क ने भारत की घटती जन्म दर और तेजी से बदलती जनसांख्यिकी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। दुनिया के शीर्ष अरबपति कारोबारी मस्क ने कहा कि भारत में जन्म दर अब जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए जरूरी रिप्लेसमेंट लेवल (प्रतिस्थापन स्तर) से काफी नीचे आ चुकी है। मस्क ने कुछ हालिया आंकड़ों का हवाला देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत की जन्म दर रिप्लेसमेंट स्तर से नीचे गिर गई है, और विशेष रूप से शिक्षित वर्ग के लोगों में यह गिरावट बहुत पहले ही शुरू हो गई थी। विभिन्न वैश्विक रिपोर्टों के अनुसार, देश के इतिहास में पहली बार भारत की प्रजनन दर इस स्तर तक नीचे आई है, जहां पिछले एक दशक में कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.3 से घटकर महज 1.9 रह गई है। इसमें सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा देश की राजधानी दिल्ली का है, जहां प्रजनन दर घटकर 1.2 पर आ गई है, जो फिनलैंड जैसे यूरोपीय देश से भी कम है। विभिन्न वैश्विक जनसंख्या रिपोर्टों के मुताबिक, भारत में कुल प्रजनन दर वर्तमान में 1.9 जन्म प्रति महिला दर्ज की गई है, जो कि जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए आवश्यक मानक रिप्लेसमेंट रेट 2.1 से कम है। इसका सीधा मतलब यह है कि औसतन भारतीय महिलाएं अब ऐसी संख्या में बच्चों को जन्म दे रही हैं, जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के बीच जनसंख्या के वर्तमान आकार और संतुलन को बनाए रखने के लिए नाकाफी है। हालांकि, वर्तमान में भारत की कुल आबादी 1.46 अरब से अधिक है और साल 2023 में भारत, चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन गया था, लेकिन साल-दर-साल प्रजनन दर में आ रही यह लगातार गिरावट भविष्य के लिए एक बड़े संकट की ओर इशारा कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश में कम बच्चे पैदा होने का यही सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले समय में भारत के जनसांख्यिकीय ढांचे में एक बड़ा असंतुलन पैदा हो जाएगा। वर्तमान में भले ही भारत को एक युवा देश माना जाता है, लेकिन कुछ दशकों बाद स्थिति पूरी तरह उलट जाएगी। ऐसी स्थिति में देश में युवाओं की संख्या सीमित रह जाएगी और बुजुर्गों की आबादी बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। बुजुर्गों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि से देश के आर्थिक विकास पर विपरीत असर पड़ेगा, क्योंकि काम करने वाले कार्यबल (वर्किंग पापुलेशन) की कमी हो जाएगी। इसके साथ ही इतनी बड़ी बुजुर्ग आबादी की स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी देश के सामने भारी चुनौतियां खड़ी हो जाएंगी, जो आने वाले समय में एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक संकट का रूप ले सकती हैं। वीरेंद्र/ईएमएस 08 जून 2026