राष्ट्रीय
08-Jun-2026
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संजय झा ने नीतीश के यूटर्न की स्टोरी से उठाया पर्दा नई दिल्ली(ईएमएस)। विपक्षी एकजुटता की नींव रखने वाले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी ही मेहनत से बने इंडिया गठबंधन से नाता क्यों तोड़ा, इस रहस्य से आखिरकार पर्दा हट गया है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कार्यकारी अध्यक्ष और नीतीश कुमार के बेहद करीबी राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने एक इंटरव्यू में चौंकाने वाले खुलासे करते हुए गठबंधन के बिखरने की पूरी इनसाइड स्टोरी बयां की है। उन्होंने सीधे तौर पर दो बड़े विपक्षी नेताओं को इस गठबंधन के सत्यानाश के लिए जिम्मेदार ठहराया है। संजय झा ने ऑन रिकॉर्ड कहा कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत इंडिया गठबंधन को व्यक्तिगत तौर पर बर्बाद कर दिया। उन्होंने बताया कि गठबंधन के भीतर यह आम सहमति बन चुकी थी कि नीतीश कुमार को इस विपक्षी मोर्चे का संयोजक बनाया जाएगा। लेकिन एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल ने अचानक नया दांव चल दिया। दोनों ने सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि गठबंधन का संयोजक किसी दलित चेहरे को होना चाहिए और इसके लिए उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम आगे बढ़ा दिया। इस अप्रत्याशित कदम के चलते कांग्रेस तुरंत बैकफुट पर आ गई और पूरी योजना खटाई में पड़ गई। जेडीयू नेता ने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार कभी भी किसी पद या संयोजक की कुर्सी के लिए बेचैन नहीं थे, उनका एकमात्र उद्देश्य सभी विपक्षी दलों को एक मंच पर लाना था। लेकिन इस गठबंधन के पास न तो कोई स्पष्ट विजन था और न ही आंतरिक एकजुटता। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय दलों को हमेशा यह महसूस होता रहा कि कांग्रेस केवल कुछ ही राज्यों में राजनीति करती है, जिससे उन्हें कोई खास फायदा नहीं था। इंटरव्यू के दौरान जब संजय झा से मौजूदा केंद्र सरकार और अटल बिहारी वाजपेयी के दौर के गठबंधन मॉडल के अंतर पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वाजपेयी सरकार के समय 24 दल शामिल थे, जबकि आज के दौर में आपसी संवाद का एक बेहतर सिस्टम है। उन्होंने साफ किया कि एनडीए में यदि बिहार या किसी राष्ट्रीय मुद्दे पर असहमति होती है, तो शीर्ष स्तर पर बातचीत कर उसे सुलझा लिया जाता है। महिला आरक्षण बिल जैसे महत्वपूर्ण फैसलों पर भी जेडीयू से सलाह ली गई थी, इसलिए पार्टी को सरकार में असहज होने जैसी कोई बात नहीं है। इसके अलावा, क्षेत्रीय पार्टियों के कमजोर होने और टूटने पर चिंता व्यक्त करते हुए संजय झा ने इसके लिए परिवारवाद को मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि जेपी आंदोलन से निकले समाजवादी नेता पहले विचारधारा से शुरू हुए, फिर जाति के नेता बने और अंततः परिवार की पार्टी बनकर रह गए, जिससे उनका पतन शुरू हुआ। उन्होंने दावा किया कि नीतीश कुमार की विरासत और जेडीयू का अस्तित्व हमेशा मजबूत रहेगा क्योंकि उन्होंने कभी राजनीति को निजी संपत्ति या बैंक अकाउंट की तरह इस्तेमाल नहीं किया। वीरेंद्र/ईएमएस/08जून2026