विशेष अदालत अगली सुनवाई में तय करेगी आरोप रांची,(ईएमएस)। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कथित 8.86 एकड़ जमीन फर्जीवाड़ा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) की विशेष अदालत से बड़ा झटका लगा है। विशेष अदालत ने उनकी डिस्चार्ज याचिका को खारिज किया है, जिससे अब इस बहुचर्चित मामले में मुख्यमंत्री सोरेन सहित करीब डेढ़ दर्जन आरोपियों के खिलाफ आरोप तय होने का रास्ता साफ हुआ है। विशेष अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जो कि अब सुनाया गया है। सीएम सोरेन ने अपनी याचिका में खुद को निर्दोष बताकर मामले से आरोपमुक्त करने की मांग की थी। उनका मुख्य तर्क था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पास पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं, और इसलिए उन्हें मामले से बरी किया जाएं। हालांकि, विशेष अदालत ने सोरेन की इन दलीलों को स्वीकार नहीं कर उनकी डिस्चार्ज याचिका को खारिज कर ईडी के पक्ष को मजबूती प्रदान की। दरअसल यह पूरा मामला रांची में 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध कब्जे और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से संबंधित है। आरोप है कि जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर हेरफेर कर अवैध तरीके से हड़पने की साजिश रची गई थी। इस मामले की जांच कर प्रवर्तन निदेशालय ने इस मनी लॉन्ड्रिंग का मामला मानकर अपनी जांच का दायरा बढ़ाया। जांच के दौरान कई स्थानों पर छापेमारी की गई, महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए और कई संदिग्धों को पूछताछ के लिए समन जारी हुआ। ईडी ने अपनी जांच पूरी करने के बाद मुख्यमंत्री सोरेन सहित कई जमीन कारोबारियों और अन्य लोगों को आरोपी बनाकर विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। जांच एजेंसी का दावा है कि जमीन से जुड़े इस कथित फर्जीवाड़े और उससे अर्जित संपत्तियों के लेन-देन में मनी लॉन्ड्रिंग के स्पष्ट तत्व पाए गए हैं। इस बहुचर्चित मामले में ईडी ने 31 जनवरी 2024 को लंबी पूछताछ के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और करीब पांच महीने तक जेल में रहने के बाद उन्हें 28 जून 2024 को झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिली। हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद वे जेल से बाहर आए और बाद में फिर से राज्य की सत्ता संभाली। विशेष अदालत द्वारा डिस्चार्ज याचिका खारिज करने के बाद अब मामले में आरोप गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अदालत यह तय करेगी कि आरोपियों के खिलाफ किन-किन धाराओं में मुकदमा चलेगा। आरोप तय होने के बाद ही मामले की नियमित सुनवाई शुरू होगी, जहां अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष अपने-अपने साक्ष्य और दलीलें अदालत के सामने पेश करेगा। झारखंड की राजनीति में यह मामला लंबे समय से गरमाया हुआ है। मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी, जेल यात्रा और फिर जमानत मिलने तक, यह लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा है। इसके बाद पीएमएलए कोर्ट द्वारा इस याचिका को खारिज किया जाना कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल, सभी की निगाहें अगली सुनवाई और आरोप गठन की प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। आशीष दुबे / 08 जून 2026