तेलअवीव (ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में जारी 2026 ईरान-इजरायल युद्ध अब एक बेहद खतरनाक और अप्रत्याशित मोड़ पर पहुंच गया है, क्योंकि अब यह जंग समंदर की लहरों तक फैल चुकी है। इजरायली नौसेना आधिकारिक तौर पर महायुद्ध में उतर गई है। इजरायल ने अपने सुदूर रणनीतिक ठिकाने यानी भू-मध्य सागर में तैनात युद्धपोतों और आधुनिक पनडुब्बियों से सीधे ईरान के मुख्य भूभाग पर लंबी दूरी की क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर तेहरान को हिला दिया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने भी पुष्टि की है कि इजरायल ने अपनी नौसैनिक ताकतों का इस्तेमाल कर तेहरान, इस्फहान और तबरीज जैसे रणनीतिक शहरों को निशाना बनाया है। इस कदम ने साबित किया है कि इजरायल अब ईरान को केवल हवाई हमलों से नहीं, बल्कि समंदर के रास्ते भी घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। भू-मध्य सागर से दागी गई इन मिसाइलों ने न केवल ईरान के एयर डिफेंस को चकमा दिया, बल्कि वैश्विक रक्षा विश्लेषकों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि क्या इजरायली नौसेना इस जंग का पासा पलट सकती है। इजरायल ने भू-मध्य सागर के अंतरराष्ट्रीय पानी से मिसाइलें लांच कीं, जिन्होंने एक अलग और गुप्त रास्ते को अपनाया, जिससे ईरान के शुरुआती चेतावनी रडार समय पर अलर्ट नहीं हो सके। इस हमले में इजरायली नौसेना की आधुनिक डॉल्फिन-क्लास सबमरीन और अत्याधुनिक सार क्लास कॉर्वेट्स का इस्तेमाल हुआ। इस नए नौसैनिक मोर्चे के खुलने के बाद दुनिया की नजरें इजरायल और ईरान की नौसेनाओं पर हैं। इजरायल की नौसेना भले ही छोटी हो, लेकिन उसकी डॉल्फिन-क्लास पनडुब्बियां एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) सिस्टम से लैस हैं, जो बिना सतह पर आए हफ्तों तक छिपी रह सकती हैं और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम क्रूज मिसाइलों से लैस मानी जाती हैं। इसके अलावा, इजरायल के पास सार क्लास कॉर्वेट्स हैं जिन पर सी-डोम और बराक-8 मिसाइल डिफेंस सिस्टम लगा है, जो उन्हें दुश्मन के हमलों से बचाता है। वहीं, ईरान की नौसैनिक रणनीति इजरायल से बिल्कुल अलग है। उसके पास दो नौसेनाएं हैं जो पारंपरिक युद्धपोतों की बजाय स्वार्म टैक्टिक्स यानी मच्छर सेना पर निर्भर करती हैं। ईरान के पास हजारों की संख्या में ऐसी छोटी और तेज गति वाली नावें हैं, जिन पर एंटी-शिप मिसाइलें, टॉरपीडो और सुसाइड ड्रोन लदे होते हैं। ईरान की सबसे बड़ी ताकत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसका नियंत्रण है, लेकिन भू-मध्य सागर से हुए इस हमले ने ईरान की इस भौगोलिक ताकत को थोड़ा कमजोर किया है, क्योंकि यह क्षेत्र ईरानी नौसैनिक पहुंच से बहुत दूर है। भू-मध्य सागर से हुए इस मिसाइल हमले के बाद अब इस बात का खतरा बढ़ गया है कि ईरान अपने प्रॉक्सी वॉर के नेटवर्क का इस्तेमाल कर समंदर में इजरायल को जवाब देगा। यमन के हूती विद्रोही पहले से ही लाल सागर में इजरायल से जुड़े जहाजों को निशाना बना रहे हैं। यह तनाव वैश्विक व्यापार मार्गों, विशेष रूप से स्वेज नहर और लाल सागर के रूट को और अधिक असुरक्षित बना सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो सकती है। इजरायल ने तकनीक के दम पर समंदर से ईरान के घर में घुसकर चोट तो कर दी है, लेकिन अब पूरी दुनिया की सांसें इस बात पर अटकी हैं कि तेहरान इस नौसैनिक चुनौती का जवाब किस अंदाज में देता है। आशीष दुबे / 08 जून 2026