व्यापार
10-Jun-2026


- विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल के दबाव ने बनाई स्थिति नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय धनिक परिवारों और फैमिली ऑफिसों के निवेश के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है। डॉलर और यूरो के मुकाबले रुपये में लगातार आ रही गिरावट के कारण अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने और बढ़ाने के लिए अब वे डॉलर से जुड़ी परिसंपत्तियों और विदेशी निवेश को तरजीह दे रहे हैं। पहले ये निवेशक मुख्य रूप से घरेलू शेयर बाजार, सावधि जमा और रियल एस्टेट जैसे विकल्पों में पूंजी लगाते थे। जानकारों का कहना है कि यह केवल मुद्रा बाजार की अस्थिरता के जोखिम से बचने का तरीका नहीं है, बल्कि लंबे समय के लिए पूंजी लगाने की एक सोची-समझी और स्थायी रणनीति है। पीएल वेल्थ के एक प्रमुख अ‎धिकारी (प्रोडक्ट ऐंड फैमिली ऑफिस) के अनुसार यह कोई अल्पकालिक बदलाव नहीं है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बाजार से निकासी और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों के दबाव जैसे कारक इस दीर्घकालिक रुझान को और मजबूत कर रहे हैं। हाल के वर्षों में डॉलर के मुकाबले रुपये में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले दो सालों में 14 फीसदी से अधिक गिर चुका है। वहीं यूरो की तुलना में यह पिछले 12 महीनों में 7 फीसदी से अधिक और दो सालों में लगभग 16 फीसदी तक गिरा है। इस अस्थिरता ने निवेशकों को अपनी पूंजी की सुरक्षा और वृद्धि के लिए नए रास्ते तलाशने पर मजबूर किया है। धनाढ्य निवेशक अब लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) और गुजरात में स्थित गिफ्ट आईएफएससी जैसे माध्यमों का उपयोग करके अपनी पूंजी सीधे विदेश में लगा रहे हैं। यह भी बताते हैं कि अधिक से अधिक फैमिली ऑफिस भारतीय रिजर्व बैंक से विदेशों में फैमिली ऑफिस शुरू करने की मंजूरी मांग रहे हैं, जिसका उद्देश्य विनियमित संस्थाओं के माध्यम से विदेशी पूंजी लगाने का एक दीर्घकालिक और सुरक्षित रास्ता तैयार करना है। वे बताते हैं कि उच्च नेट-वर्थ वाले व्यक्तियों (एचएनआई) और फैमिली ऑफिसों के बीच डॉलर-आधारित संपत्तियों की मांग स्पष्ट रूप से बढ़ रही है। पारंपरिक घरेलू शेयरों और एफडी के बजाय, अब वैश्विक सूचकांकों, यूरोप के मिडकैप और अमेरिकी प्रौद्योगिकी फंडों पर केंद्रित विदेशी इक्विटी फंडों में निवेश पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। हालांकि, वे सलाह देते हैं कि विदेशी इक्विटी में आकर्षण भले ही अधिक हो, लेकिन डॉलर-आधारित फिक्स्ड इनकम के फायदेमंद अवसरों को भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। यह प्रवृत्ति भारतीय निवेशकों की बढ़ती वैश्विक सोच और अपनी संपत्ति को मुद्रा जोखिमों से बचाने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सतीश/ईएमएस 10 जून 2026